मध्यप्रदेश सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर मंत्रालयवार उच्च स्तरीय समीक्षा शुरू,

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अब सभी मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की व्यापक एवं उच्च स्तरीय समीक्षा की प्रक्रिया प्रारंभ होने जा रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा विस्तृत कार्यक्रम जारी किया गया है। समीक्षा बैठकों का उद्देश्य पिछले दो वर्षों में किए गए कार्यों का मूल्यांकन करना, विभागीय प्रगति को समझना, खामियों की पहचान करना और भविष्य की दिशा तय करना है।समीक्षा की बैठकों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उपस्थित रहेंगे। इनके साथ संबंधित विभाग के मंत्री, मुख्य सचिव तथा विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। इन बैठकों में प्रत्येक विभाग के दो वर्ष के संपूर्ण कार्यकाल की उपलब्धियों और कार्यक्रमों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभागीय योजनाएं और कार्यक्रम जनता तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचें और शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य हो।सरकार द्वारा तय की गई प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक मंत्री को अपने विभाग से संबंधित सभी प्रमुख कार्यों, संचालित योजनाओं, क्रियान्वित कार्यक्रमों, बजटीय प्रगति तथा लाभान्वित लोगों की संख्या का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना होगा। इसमें विभागीय संरचना, नीति-क्रियान्वयन, प्रमुख उपलब्धियां, नवाचार, सार्वजनिक संपर्क, राज्य के विकास में योगदान और विशेष प्रभाव वाले कार्यों का उल्लेख अनिवार्य है।समीक्षा में यह भी देखा जाएगा कि विभागों ने राज्य सरकार की घोषणाओं और प्राथमिकताओं को कितनी प्रभावी रूप से लागू किया है। इसके साथ ही मंत्रालयों द्वारा शुरू किए गए नए कार्यक्रमों, सुधारात्मक पहल, डिजिटल सेवाओं, पारदर्शिता से जुड़े उपायों और जनहित में किए गए संवेदनशील निर्णयों का मूल्यांकन भी शामिल रहेगा।

कमियों और चुनौतियों पर विशेष चर्चा

समीक्षा बैठकों का मुख्य उद्देश्य केवल उपलब्धियां गिनाना नहीं है, बल्कि उन क्षेत्रों की पहचान भी करना है जहां सुधार की आवश्यकता बनी हुई है। इसलिए मंत्रियों और संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि विभागों में कौन-कौन सी खामियां या लंबित समस्याएं बनी हुई हैं।इन समस्याओं के निराकरण के लिए भी व्यावहारिक सुझाव एवं समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने निर्देश दिया है कि केवल समस्याएं बताकर जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी, बल्कि उनके समाधान की दिशा में क्रियाशील और ठोस योजना भी साझा की जाए। इससे शासन के कार्य में गति आएगी और विभागों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

आगामी तीन वर्षों के लिए लक्ष्य निर्धारण होगा प्रमुख फोकस

इन समीक्षा बैठकों में आगामी तीन वर्षों के लिए विभागवार लक्ष्य निर्धारण पर विशेष फोकस रहेगा। मंत्रियों और अधिकारियों से पूछा जाएगा कि वे विभागीय लक्ष्यों को कैसे प्राप्त करेंगे और इसके लिए उनकी विस्तृत रणनीति क्या होगी। इसमें वित्तीय प्रबंधन, मानव संसाधन उपयोग, तकनीकी उन्नयन, नीति सुधार, आधुनिक प्रशासनिक पद्धतियां, और जनसेवा से जुड़े सुधार प्रस्ताव शामिल होंगे।विभागीय लक्ष्य केवल कागजों में न रह जाएं, इसके लिए ‘ग्राउंड-इम्प्लीमेंटेशन प्लान’ को भी अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक विभाग को यह बताना होगा कि तैयार की गई कार्ययोजना को जमीन पर प्रभावी तरीके से कैसे लागू किया जाएगा। कार्ययोजना के चरणबद्ध क्रियान्वयन, समीक्षा तंत्र, निगरानी व्यवस्था, और समयसीमा तय करने पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।

जनहित और सुशासन को केंद्र में रखकर समीक्षा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि समीक्षा बैठकों का उद्देश्य विभागों के काम में गति लाना, पारदर्शिता बढ़ाना और जनसाधारण तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना कठिनाई पहुंचाना है। इसलिए समीक्षा का ढांचा इस प्रकार तैयार किया गया है कि वह पूरी तरह परिणाम आधारित हो।जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता, लाभार्थियों तक पहुंच, सेवा वितरण की गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और राज्य के विकास पर पड़ा प्रभाव—सभी विषयों को समीक्षा प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी।

उत्तरदायित्व और पारदर्शिता पर जोर

सरकार का यह कदम प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने और सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय का मानना है कि नियमित समीक्षा और उत्तरदायित्व तय होने से न केवल कार्य में गति बढ़ेगी, बल्कि जनविश्वास भी मजबूत होगा। विभागीय कमजोरियों और चुनौतियों को समय रहते पहचानकर उनका समाधान किया जा सकेगा।

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