
प्रदेश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर एक बार फिर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ग्वालियर, सागर और मंडीदीप में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) “बहुत खराब (Very Poor)” श्रेणी में दर्ज किया गया है।विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में गिरावट, दीपावली के बाद का धुआं और हवा की धीमी गति इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं। यदि तत्काल नियंत्रणात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका है।
प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता स्थिति (21 अक्टूबर 2025 के आंकड़े अनुसार)
| शहर | AQI | श्रेणी |
|---|---|---|
| ग्वालियर | 302 | बहुत खराब |
| सागर | 231 | बहुत खराब |
| मंडीदीप | 220 | बहुत खराब |
| जबलपुर | 206 | खराब |
| पीथमपुर | 180 | खराब |
| बैतूल | 167 | खराब |
| इंदौर | 161 | खराब |
| भोपाल | 156 | खराब |
| देवास | 137 | मध्यम |
| कटनी | 110 | मध्यम |
विशेषज्ञों की राय और कारण
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी श्री बृजेश शर्मा ने बताया कि दीपावली के दौरान आतिशबाजी, तापमान में गिरावट और हवा की कम गति के चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। विशेषकर सुबह और शाम के समय धूल और धुएं की सांद्रता अधिक देखी जा रही है, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
प्रदूषण के तीन प्रमुख कारण
1️⃣ मौसम ने साथ नहीं दिया: दीपावली की रात हवा की गति मात्र 8–10 किमी/घंटा रही, जबकि सामान्य स्थिति में यह लगभग 40 किमी/घंटा होती है। ठंडी और स्थिर हवा के कारण धुआं ऊपर नहीं उठा और जमीन के पास जमा रहा।
2️⃣ पटाखों की बिक्री में वृद्धि: पटाखा व्यापारी संघ के अनुसार, इस बार ₹10 करोड़ का कारोबार हुआ, जो पिछले वर्ष के ₹9 करोड़ की तुलना में 10% अधिक है।
3️⃣ सीमित नियंत्रण उपाय: भोपाल में दीपावली की रात सिर्फ 19 वाहनों से फॉगिंग और पानी का छिड़काव किया गया। पिछले वर्ष दशहरे के बाद से यह प्रक्रिया लगातार चल रही थी।
शहरवार स्थिति और विशेषज्ञ टिप्पणी
- ग्वालियर (AQI 302): प्रदेश का सबसे प्रदूषित शहर, “बहुत खराब” श्रेणी में। बुज़ुर्गों, बच्चों और हृदय/श्वसन रोगियों के लिए स्थिति खतरनाक।
- सागर व मंडीदीप: तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र, जहां निरंतर प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है। प्रशासन से सख्त कदमों की मांग।
- भोपाल व इंदौर: सामान्यतः साफ रहने वाले शहर अब “खराब” श्रेणी में पहुंच गए हैं। प्रशासनिक, औद्योगिक और यातायात क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर अधिक।
सावधानी और आगे की दिशा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुबह-शाम के समय बाहर निकलने से बचें, मास्क का उपयोग करें, तथा वाहनों के अत्यधिक उपयोग और कचरा जलाने से परहेज करें।MPPCB ने भी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे सड़क धूल नियंत्रण, वाहन जांच, पानी के छिड़काव, और औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी जैसे तात्कालिक कदम उठाएं।
यह स्थिति राज्य सरकार और नागरिकों दोनों के लिए चेतावनी है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के ठोस उपाय तुरंत नहीं किए गए, तो मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता स्वास्थ्य के लिए और अधिक हानिकारक बन सकती है।