मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर – 80 लाख से अधिक के जाली बिल,

मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (MPSTDC) में भ्रष्टाचार और फर्जी बिलिंग का बड़ा मामला सामने आया है। निगम के भोपाल स्थित विंड्स एंड वेव्स तथा बोट क्लब के तत्कालीन दो प्रबंधकों द्वारा करोड़ों के कथित घोटाले की आशंका के बीच, क्राइम ब्रांच ने धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।यह कार्रवाई क्षेत्रीय प्रबंधक हरनाथ सिंह दंडोतिया द्वारा की गई शिकायत के आधार पर की गई। शिकायत में निगम के कर्मचारी अरविंद शर्मा, अनिल कुरुप सहित एक ही परिवार से जुड़े तीन फर्म संचालकों को साजिशकर्ता बताते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं।जांच में सामने आया है कि अरविंद शर्मा और अनिल कुरुप ने मिलकर मेसर्स गणेश ट्रेडर्स, मेसर्स आदित्य एंटरप्राइजेस की प्रोप्राइटर देबजानी मुखर्जी, तथा मेसर्स सिद्धि विनायक ट्रेडर्स के प्रोप्राइटर आदित्य मुखर्जी और संजय मुखर्जी के साथ मिलकर फर्जी बिल प्रस्तुत किए और उन्हें भुगतान भी करवाया।क्राइम ब्रांच द्वारा अब तक की जांच में लगभग 80 लाख 81 हजार रुपये के जाली बिल और फर्जी कोटेशन तैयार किए जाने का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि इनमें से एक बड़ी राशि संबंधित फर्मों के खातों में भुगतान के रूप में भेजी जा चुकी है। यह पूरा फर्जीवाड़ा कई महीनों तक सुनियोजित तरीके से किया गया, जिसमें सामानों की खरीद, उनके दाम और बिलिंग से जुड़े दस्तावेजों को गलत तरीके से तैयार किया गया।स्रोतों के अनुसार, यह मामला सिर्फ शुरुआत है। पर्यटन निगम में पूर्व में की गई अन्य बड़ी खरीदियों की जांच की जाए, तो अनुमान है कि करोड़ों रुपये का और बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि प्रबंधकों और फर्म संचालकों की मिलीभगत से लंबे समय से खरीद-फरोख्त में अनियमितताएँ हो रही थीं।

इसके अतिरिक्त, जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि भ्रष्टाचार से अर्जित धन का उपयोग विदेश यात्राओं और व्यक्तिगत विलासिता पर किया गया। आम जनता के पैसों से की गई इस ‘अय्याशी’ ने पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।पर्यटन निगम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। क्राइम ब्रांच द्वारा आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही, निगम प्रबंधन ने संबंधित दस्तावेज, बिल, वाउचर और फर्मों के भुगतान रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं ताकि आगे की जांच तेज की जा सके।मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार द्वारा भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। जांच पूरी होने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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