
भोपाल, दिनांक 17 जून 2025: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 को अनुमोदन प्रदान किया गया है।नवीन पदोन्नति नियमों में आरक्षित वर्गों के हितों की रक्षा करते हुए उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया गया है। अनुसूचित जाति (SC) के लिए 16% और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 20% आरक्षण का प्रावधान रखा गया है। यह प्रावधान न केवल सामाजिक न्याय को बढ़ावा देगा, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं में सामाजिक समरसता भी सुनिश्चित करेगा।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि SC एवं ST वर्ग के लोकसेवकों को भी मेरिट के आधार पर पदोन्नति प्राप्त करने का समान अवसर प्रदान किया जाएगा, जिससे योग्य और कर्मठ अधिकारी आगे आ सकें। इस निर्णय से प्रशासनिक सेवाओं में दक्षता और कार्यकुशलता को और अधिक बल मिलेगा।नए नियमों के तहत अब वर्तमान वर्ष में ही आगामी वर्ष की रिक्तियों के लिए पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित कर चयन सूची तैयार की जाएगी। इस व्यवस्था को अग्रिम डी.पी.सी. (Advance DPC) के रूप में जाना जाएगा, जिससे विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया अधिक समयबद्ध और योजनाबद्ध रूप से सम्पन्न हो सकेगी।पदोन्नति की प्रक्रिया में वरिष्ठता (Seniority) का भी समुचित ध्यान रखा गया है। वरिष्ठ लोक सेवकों में से वे ही अधिकारी पदोन्नति के पात्र होंगे जो निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त करेंगे। इससे पदोन्नति में पारदर्शिता बनी रहेगी और अयोग्य कार्मिकों को मात्र वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति नहीं दी जा सकेगी।
विशेष रूप से प्रथम श्रेणी के लोक सेवकों के लिए पदोन्नति की प्रक्रिया में Merit cum Seniority का सिद्धांत लागू किया गया है, जिससे श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अधिकारी को प्राथमिकता दी जा सके।मंत्रि-परिषद के इस निर्णय से प्रदेश में शासन प्रशासन की गुणवत्ता को नई दिशा मिलेगी तथा योग्य एवं कर्मठ अधिकारियों को समय पर पदोन्नति मिल सकेगी। साथ ही आरक्षित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए उन्हें समान अवसर भी प्राप्त होंगे।यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नेतृत्व क्षमता और समावेशी प्रशासनिक सोच को दर्शाता है, जो “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के अनुरूप है।योजनान्तर्गत आगामी वर्षों में अति उच्चदाब पारेषण परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए यथा केंद्रीय पारेषण इकाई से स्वीकृत पारेषण प्रणाली सुदृढीकरण के लिए आवश्यक निर्माण और उन्नयन कार्य के लिए 1 हजार 154 करोड़ रूपये, सिंहस्थ-2028 के लिए आवश्यक कार्य के लिए 185 करोड़ रूपये, प्रदेश में नवीन अति उच्चदाब उपकेन्द्रों का निर्माण के लिए 1 हजार 15 करोड़ रूपये, मुरैना संभागीय मुख्यालय और ग्वालियर शहर के उत्तरी भाग को अनवरत विद्युत् आपूर्ति के लिए नवीन अति उच्चदाब लाइनों के निर्माण के लिए 54 करोड़ रूपये, प्रदेश में विद्यमान अति उच्च्दाब ट्रांसफार्मरों की क्षमता संवर्धन/वृद्धि के लिए 1280 करोड़ रूपये, आरडीएसएस योजना के अंतर्गत वितरण कंपनियों के लिए 184 नग नवीन 33 केव्ही बे निर्माण के लिए 81 करोड़ रूपये, डीपी / एफपी लाइन (डबल पोल/फोर पोल) लाईन को डीसीडीएस /डीसीएसएस (डबल सर्किट डबल स्ट्रन्ग/डबल सर्किट सिंगल स्ट्रन्ग) टॉवर लाइन में रुपांतरण के लिए 662 करोड़, अति उच्चदाब टेप लाइनों के स्थान पर लाईनों का लूप-इन लूप-आउट (एलआईएलओ) किया जाना एवं एकल स्त्रोत से प्रदायित उपकेंद्रों के लिए नई लाइनों का निर्माण के लिए 451 करोड़ रूपये तथा अन्य कार्य जिसमें SCADA प्रणाली का प्रतिस्थापन, 132 केवी द्वितीय मुख्य बस तथा 132/33 केवी बस कपलर का निर्माण, 33 केवी कैपेसिटर बैंक की स्थापना एवं अन्य कार्य) के लिए 281 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गये है।