भारतीय शेयर बाजार ने बनाया नया इतिहास, सेंसेक्स 86,000 और निफ्टी 26,300 के पार,

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भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसने न सिर्फ दलाल स्ट्रीट को उत्साहित कर दिया, बल्कि वैश्विक निवेशकों का भी ध्यान भारत की ओर आकर्षित कर दिया। बीएसई सेंसेक्स पहली बार 86,000 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया, जबकि निफ्टी50 ने भी अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाई हासिल कर ली। विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती और मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतों ने बाजार को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया।गुरुवार को सेंसेक्स 416.67 अंकों की छलांग लगाकर 86,026.18 के ऐतिहासिक स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले, 27 सितंबर 2024 को सेंसेक्स ने 85,978.25 का उच्चतम रिकॉर्ड बनाया था। इसी तरह, निफ्टी50 101.65 अंक चढ़कर 26,306.95 पर पहुंच गया, जो अब तक का उसका नया ऑल-टाइम हाई है। निफ्टी का पिछला रिकॉर्ड 26,277 का था।बाजार में लगातार दो दिनों—बुधवार और गुरुवार—को देखने को मिला उछाल सिर्फ तकनीकी बढ़त नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक संकेत छिपे हैं। सबसे प्रमुख संकेत यह है कि अगले महीने तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दोनों की ओर से ब्याज दरों में कटौती की आशा है। यह अनुमान बाजार के लिए बेहद सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि दरों में कटौती से बॉन्ड की तुलना में इक्विटी की आकर्षकता बढ़ जाती है और निवेशक बड़े पैमाने पर शेयर बाजार में निवेश बढ़ाते हैं।वैश्विक वित्तीय संस्थाओं ने भी भारतीय बाजार को लेकर काफी सकारात्मक रुख दिखाया है। जेपी मॉर्गन ने निफ्टी50 का टारगेट 2026 के अंत तक 30,000 तय किया है, जबकि एमएससीआई इंडिया की अर्निंग्स ग्रोथ 2026 में 13% और 2027 में 14% रहने का अनुमान है। मैक्वेरी का कहना है कि जोखिम का संतुलन अब भारतीय बाजार के पक्ष में झुक चुका है और निफ्टी के 2026 में 30,000 के करीब रहने की संभावना अधिक है।

मॉर्गन स्टैनली ने सेंसक्स के लिए बियर केस में 95,000 और बुल केस में 1,07,000 तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। गोल्डमैन सैक्स ने निफ्टी के लिए 29,000 का लक्ष्य प्रस्तुत किया है। एसएसबीसी ने भी भारतीय शेयरों को ओवरवेट श्रेणी में रखा है, जो संकेत है कि विदेशी निवेशकों की नजर भारत की स्थिर ग्रोथ और मजबूत अर्थव्यवस्था पर केंद्रित है।जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी. के. विजयकुमार के अनुसार, वर्तमान में बाजार को तकनीकी और फंडामेंटल दोनों मोर्चों से मजबूत टेलविंड्स मिल रहे हैं। अक्टूबर में दिखी खपत में तेजी, FY26 की तीसरी और चौथी तिमाही में कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में बदल सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी फेड की संभावित ब्याज दर कटौती और रूस-यूक्रेन संघर्ष में शांति समझौते की उम्मीद ने वैश्विक इक्विटी बाजारों में सकारात्मक सेंटीमेंट पैदा किया है।

हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि भारतीय बाजार का वैल्यूएशन अभी भी प्रीमियम पर है, इसलिए तेज और लंबी रैली की गुंजाइश फिलहाल सीमित हो सकती है। वहीं जेपी मॉर्गन ने कहा कि भले ही वैल्यूएशन ऊंचे हैं, लेकिन उभरते बाजारों की तुलना में यह स्तर अभी भी दीर्घकालिक औसत से नीचे है। वैश्विक मौद्रिक ढील की स्थिति इक्विटी बाजारों को स्ट्रक्चरल रूप से री-रेट कर सकती है, क्योंकि इससे पूंजी की लागत घटेगी और रेट-सेंसिटिव सेक्टर्स में जोखिम घटेगा।कुल मिलाकर, भारतीय बाजार में यह रैली सिर्फ एक क्षणिक उत्साह नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का संकेत है। आने वाले समय में यदि ब्याज दरों में कटौती और वैश्विक परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं, तो भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयां छू सकता है और वैश्विक स्तर पर निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बन सकता है।

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