
भारत सरकार ने देश की कर प्रणाली को और अधिक सरल, पारदर्शी एवं उपभोक्ता हितैषी बनाने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST) में व्यापक बदलावों की घोषणा की है। इन बदलावों को “GST 2.0 – वन नेशन, वन टैक्स” के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
प्रमुख बदलाव
- कर दरों का पुनर्संरचना
- अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं को अब 5% और 18% के अंतर्गत शामिल किया गया है।
- आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन बीमा, दवाइयाँ आदि) को 0% (शून्य दर) में लाया गया है।
- विलासिता एवं “सिन” वस्तुओं (जैसे तंबाकू, प्रीमियम कारें) पर कर दर बढ़ाकर 40% तक कर दी गई है।
- उपभोक्ता को सीधा लाभ
- टीवी, फ्रिज, एयर कंडीशनर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर कर दर 28% से घटाकर 18% कर दी गई है।
- रोज़मर्रा के उपभोग की वस्तुओं और सेवाओं पर कर घटने से उपभोक्ता की जेब पर बोझ कम होगा।
- कंपनियों ने तुरंत अपने उत्पादों की कीमतों में कटौती की घोषणा की है, जिससे जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
- आर्थिक प्रभाव
- सरकार का अनुमान है कि इन बदलावों से उपभोग बढ़ेगा, महंगाई पर दबाव घटेगा और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
- राज्यों और केंद्र दोनों के लिए कर संग्रह अधिक स्थिर एवं पारदर्शी होगा।
- प्रशासनिक सुधार
- जीएसटी अपीलीय प्राधिकरण (GSTAT) पोर्टल लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से कर विवादों का त्वरित निवारण होगा।
- जीएसटी प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल, पारदर्शी एवं उपयोगकर्ता-हितैषी बनाने के लिए नए टूल और सरल अनुपालन तंत्र लागू किए गए हैं।
सरकार का दृष्टिकोण
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि “जीएसटी 2.0 देश को सरल, न्यायपूर्ण और उपभोक्ता-केंद्रित कर प्रणाली की ओर ले जाएगा। यह न केवल करदाताओं के लिए सुविधा बढ़ाएगा बल्कि भारत को वैश्विक निवेश का और भी आकर्षक गंतव्य बनाएगा।”