भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ समय से जारी तनाव के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में फिर से सुधार की उम्मीद बनी हुई है। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश राज्य मंत्री रहे एम.जे. अकबर ने कहा है कि भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते इतने गहरे हैं कि कोई भी तनाव लंबे समय तक दोनों देशों के संबंधों पर हावी नहीं रह सकता।ढाका में आयोजित ‘बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026’ को संबोधित करते हुए अकबर ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे, लेकिन इसे स्थायी संकट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा कभी नहीं लगता कि गुजरते हुए बादल या तूफान भारत-बांग्लादेश संबंधों की धूप को मिटा सकते हैं।” उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को इस नजरिए से देखने की जरूरत है कि समाधान क्यों संभव नहीं है, बल्कि यह सोचना चाहिए कि समाधान संभव कैसे बनाया जा सकता है।
‘क्या मुमकिन है’ से आगे बढ़कर सोचने की जरूरत
अकबर ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच कई मुद्दों पर चर्चा के दौरान अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कोई समाधान संभव है। उनके अनुसार, अब नजरिया बदलने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि हमें ‘क्या मुमकिन है’ से आगे बढ़कर ‘यह क्यों मुमकिन नहीं है’ पर विचार करना चाहिए। इससे दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों के नए रास्ते खुल सकते हैं।
भाषा और संस्कृति से जुड़े हैं दोनों देश
पूर्व पत्रकार और लेखक एम.जे. अकबर ने भारत और बांग्लादेश के संबंधों को सिर्फ राजनीतिक या रणनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा कि दोनों देश सभ्यतागत रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।अकबर ने बांग्लादेश की पहचान में भाषा और संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाषा बांग्लादेश की पहचान और उसकी ताकत का महत्वपूर्ण आधार है।
बांग्लादेश के विदेश मंत्री को बधाई
अकबर ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान को संयुक्त राष्ट्र महासभा का अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर बांग्लादेश की विश्वसनीयता की मान्यता बताया।
हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका
भारत की विदेश और सुरक्षा नीति पर बात करते हुए अकबर ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को न तो खरीदा जा सकता है और न ही किसी दूसरे देश या संस्था को आउटसोर्स किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव देश की आंतरिक मजबूती पर टिकी होती है।उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि इस क्षेत्र में भारत अपनी नौसैनिक क्षमताओं तथा क्षेत्रीय भागीदारी को लगातार मजबूत कर रहा है।भारत-बांग्लादेश संबंधों में इस समय शेख हसीना के प्रत्यर्पण, सीमा से जुड़े विवादों और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर तनाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में अकबर का बयान दोनों देशों के रिश्तों को लेकर संवाद और सुधार की संभावनाओं पर जोर देता है।