अमेरिकी सीनेट बजट कमेटी के चेयरमैन एवं वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में अलास्का में हुई बैठक की प्रमुख वजह भारत पर लगाए गए टैरिफ रहे। ग्राहम ने दावा किया कि पुतिन को वार्ता की मेज तक लाने में ट्रंप का भारत पर रूसी गैस और तेल की खरीद पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का निर्णय निर्णायक साबित हुआ।ग्राहम ने स्पष्ट किया कि इस कदम से रूसी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा, जिससे पुतिन को बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह रणनीति इस बात का उदाहरण है कि रूस पर आर्थिक दबाव डालकर ही यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ठोस पहल की जा सकती है।सीनेटर लिंडसे ग्राहम, जो ट्रंप के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं, ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि रूस की आय के प्रमुख स्रोतों पर अंकुश लगाया जाए तो पुतिन को युद्ध समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

अलास्का में 15 अगस्त को हुई ट्रंप-पुतिन बैठक के बाद ग्राहम ने कहा कि अब यह समय है जब अमेरिका और उसके सहयोगी रूस की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को निशाना बनाएं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और सीनेटर मार्को रुबियो मिलकर पुतिन को यह स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि यदि उन्होंने यूक्रेन युद्ध को समाप्त नहीं किया तो रूसी अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया जाएगा।ग्राहम ने कहा, “पुतिन की शक्ति उसकी जेब में है। यदि हम उसकी आर्थिक नींव को कमजोर कर दें तो वह लंबे समय तक युद्ध जारी नहीं रख पाएगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत पर टैरिफ लगाने का कदम इसी रणनीति का हिस्सा था, जिससे रूस की आय घटे और वैश्विक स्तर पर दबाव बने।विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राहम का यह बयान अमेरिकी राजनीति और कूटनीति में रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अपनाई जा रही रणनीति की दिशा को स्पष्ट करता है। ट्रंप और पुतिन की मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई नए सवाल भी खड़े किए हैं, लेकिन ग्राहम का कहना है कि इसका मूल संदेश यही है कि आर्थिक दबाव से ही शांति की राह निकाली जा सकती है।