
भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए सैन्य तनाव को लेकर पाकिस्तान के कुछ स्वतंत्र पत्रकारों ने हाल में कई दावे किए हैं। इन पत्रकारों का कहना है कि उस अवधि में पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक स्थिति सेना के निर्णयों पर अत्यधिक निर्भर रही। उनका आरोप है कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी मीडिया पर कई प्रकार के नियंत्रण लगाए गए, जिससे घटनाओं की वास्तविक जानकारी जनता तक सीमित रूप से पहुँची।पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार अहमद नूरानी ने हाल में एक वीडियो और लेख के माध्यम से दावा किया कि भारत ने कथित ‘‘ऑपरेशन सिंदूर’’ के दौरान कई लक्ष्यों पर सटीकता से हमला किया। उनके अनुसार, पाकिस्तान की कुछ मिसाइलें भारतीय क्षेत्र में पार नहीं जा सकीं। नूरानी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व, विशेषकर जनरल असीम मुनीर, पर संघर्ष के दौरान कई सवाल उठाए गए।ये दावे स्वतंत्र पत्रकारों द्वारा किए गए हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि किसी भी सरकार या सैन्य संस्था द्वारा नहीं की गई है। सीमा-पार सैन्य घटनाओं से जुड़े बयानों की सत्यता आमतौर पर गोपनीय जानकारी, सुरक्षा कारणों और सरकारी पुष्टि पर निर्भर करती है।,
नूरानी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सत्ता संरचना में सेना का प्रभाव अत्यधिक है और सैन्य नेतृत्व का निर्णय राष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा असर डालता है। उन्होंने असीम मुनीर को चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज के पद पर नियुक्त किए जाने को इसी शक्ति-संतुलन का हिस्सा बताया।क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत-पाक संबंध दशकों से सैन्य और राजनीतिक तनाव से प्रभावित रहे हैं। किसी भी संघर्ष या सैन्य कार्रवाई को लेकर दोनों देशों से पारदर्शी, आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिए पत्रकारों के दावे आगे की पुष्टि का विषय बने हुए हैं।