भारत ने वित्त वर्ष 2023–24 में स्वदेशी रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश ने 38,424 करोड़ रुपये (लगभग 4.15 अरब डॉलर) के रक्षा उपकरणों का निर्यात किया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। यह आंकड़ा वर्ष 2024 की तुलना में 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि को दर्शाता है, जो भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और वैश्विक मांग में बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस उपलब्धि को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से एक वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।इस निर्यात में लगभग 55 प्रतिशत योगदान सरकारी रक्षा कंपनियों का रहा, जबकि शेष उत्पादन निजी क्षेत्र द्वारा किया गया। यह देश में विकसित हो रहे मजबूत रक्षा इको-सिस्टम का प्रमाण है।भारत वर्तमान में 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, फिलीपींस और आर्मेनिया प्रमुख ग्राहक हैं। निर्यात किए जाने वाले प्रमुख उपकरणों में मिसाइल सिस्टम, नौसैनिक बोट्स, तोपखाना, रडार सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स शामिल हैं।प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा निर्यात को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिससे इस क्षेत्र में तेज़ी से विकास हुआ है।आर्मेनिया भारत का प्रमुख रक्षा खरीदार बनकर उभरा है, जिसने पिनाका रॉकेट लॉन्चर, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, ATAGS तोप और स्वाति रडार जैसे आधुनिक उपकरण खरीदे हैं। वहीं, फिलीपींस ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली का अधिग्रहण किया है, जो भारत के रक्षा निर्यात इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।यह उपलब्धि न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन और कूटनीतिक प्रभाव में भी भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।