भारत और अमेरिका के दुश्मनों को हथियार और सैटेलाइट सहायता दे रहा चीन: गंभीर आरोप,

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों और मीडिया रिपोर्टों ने चीन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह भारत और अमेरिका के विरोधी देशों — रूस और पाकिस्तान — को न केवल हथियारों से लैस कर रहा है, बल्कि जासूसी सैटेलाइट से खुफिया जानकारी भी साझा कर रहा है। यह खुलासा भारत के साथ पाकिस्तान की सीमा पर हुए संघर्ष और यूक्रेन युद्ध से जुड़ी घटनाओं की जांच के बाद सामने आया है।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष में चीन की भूमिका उजागर

मई महीने में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमावर्ती झड़पों के दौरान पाकिस्तान ने चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया था। इस घटना की पुष्टि भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने की थी। उन्होंने खुलासा किया था कि संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान को लाइव सैटेलाइट इनपुट और निगरानी सहायता प्रदान की थी, जिससे वह भारतीय ठिकानों की स्थिति जान सके।भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यह सहायता चीन की “याओगन” उपग्रह श्रृंखला के माध्यम से दी गई थी, जो उच्च-रिज़ॉल्यूशन रडार और ऑप्टिकल इमेजिंग तकनीक से लैस हैं। यह उपग्रह भारत के सीमावर्ती इलाकों की भी लगातार निगरानी करते हैं।

अब रूस को भी मिल रही चीन से खुफिया मदद

भारत के बाद अब चीन पर रूस को यूक्रेन युद्ध में सैटेलाइट इंटेलिजेंस (खुफिया जानकारी) देने के आरोप लगे हैं। यूक्रेन की विदेश खुफिया एजेंसी (SIS) के अधिकारी ओलेह अलेक्जेंड्रोव ने खुलासा किया कि चीन, रूस को यूक्रेन के भीतर मिसाइल हमलों को और अधिक सटीक बनाने में मदद कर रहा है।

अलेक्जेंड्रोव ने यूक्रेनी मीडिया यूक्रिनफॉर्म को बताया, “चीन उपग्रहों के माध्यम से यूक्रेन के क्षेत्र की जासूसी कर रहा है और रूस को लक्ष्य चुनने में सहायता प्रदान कर रहा है। हमारे पास इसके ठोस सबूत मौजूद हैं।”

याओगन-33 सीरीज के उपग्रहों से निगरानी

यूक्रेनी मिलिट्री वेबसाइट ‘मिलिटार्नी’ के मुताबिक, चीन की “याओगन-33” श्रृंखला के तीन उपग्रह — याओगन 33, याओगन 33-03 और याओगन 33-04 — पश्चिमी यूक्रेन के रणनीतिक इलाकों की निगरानी करते पाए गए हैं।इन उपग्रहों की विशेषता यह है कि ये 700 किलोमीटर की ऊँचाई से पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं और हर 90 मिनट में एक बार यूक्रेन के ऊपर से गुजरते हैं, जिससे वे एक ही क्षेत्र की लगातार निगरानी कर सकते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 4 अक्टूबर को सुबह 0:00 बजे से 11:30 बजे के बीच ये उपग्रह नौ बार ल्वीव शहर के ऊपर से गुजरे।इसके अलावा, ऑप्टिकल टोही उपग्रह “याओगन 34” भी 5 अक्टूबर को सक्रिय पाया गया, जिसने उस दिन कुल सात बार यूक्रेन के ऊपर परिक्रमा की। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपग्रहों से मिली जानकारी का उपयोग रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा और रक्षा प्रतिष्ठानों पर मिसाइल हमले करने में किया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चिंता

अमेरिका और नाटो देशों ने इस रिपोर्ट पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि यह आरोप सत्य साबित होते हैं, तो यह अंतरराष्ट्रीय नियमों और उपग्रह उपयोग संधियों का उल्लंघन होगा। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि “किसी तीसरे देश द्वारा युद्धरत राष्ट्र को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सैटेलाइट इंटेलिजेंस देना गंभीर वैश्विक सुरक्षा चिंता है।”भारत के सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी कहा है कि चीन की यह नीति एशिया और यूरोप दोनों में अस्थिरता पैदा कर सकती है। रक्षा विश्लेषक मानते हैं कि चीन अपनी रणनीति के तहत “मल्टी-फ्रंट इंटेलिजेंस वॉरफेयर” चला रहा है — यानी, अपने विरोधियों के दुश्मनों को सशक्त बनाकर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाना।

चीन की चुप्पी और संभावित असर

चीन ने इन आरोपों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि बीजिंग ने पहले कहा था कि उसके सैटेलाइट “वैज्ञानिक और वाणिज्यिक उद्देश्यों” के लिए हैं। लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक, चीन की सैन्य-संचालित स्पेस एजेंसी इन उपग्रहों से जुटाए गए डेटा को सैन्य उपयोग में ला रही है।इन घटनाओं से भारत, अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ चीन के संबंधों में और तनाव बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला भविष्य में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी उठाया जा सकता है।

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