भोपाल में दलित–आदिवासी संगठनों का राष्ट्रीय मंथन, भोपाल डिक्लेरेशन–2 की रूपरेखा होगी तैयार

भोपाल डिक्लेरेशन के 25 वर्ष पूरे होने से पहले देशभर के दलित एवं आदिवासी संगठनों ने एक बार फिर साझा वैचारिक मंथन की ऐतिहासिक पहल की है। इसी क्रम में 12 एवं 13 जनवरी 2026 को भोपाल में भोपाल डिक्लेरेशन–2 का आयोजन किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय स्तर का आयोजन बहुजन इंटेलेक्ट, आदिवासी सेवा मंडल एवं होमा परिसंघ के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न होगा।आयोजकों के अनुसार भोपाल डिक्लेरेशन–2 के माध्यम से वर्तमान समय की सामाजिक–राजनीतिक चुनौतियों, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा बहुजन एकजुटता को लेकर ठोस प्रस्ताव और संकल्प प्रस्तुत किए जाएंगे। यह आयोजन दलित, आदिवासी एवं बहुजन समाज के लिए सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विमर्श होगा। इसमें देशभर से लगभग 500 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों के शामिल होने की संभावना है।उल्लेखनीय है कि पहला ऐतिहासिक भोपाल डिक्लेरेशन वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में जारी किया गया था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए आयोजन समिति एवं सहयोगी संगठनों ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह से इस कार्यक्रम में अध्यक्षता करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का अनुरोध किया है, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया है।

पहला दिन | 12 जनवरी 2026

स्थान : होटल पलाश, भोपाल

आयोजन के पहले दिन एक बंद सत्र (ड्राफ्टिंग सेशन) आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 30 चयनित प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस सत्र में वर्ष 2002 के ऐतिहासिक भोपाल डिक्लेरेशन की विस्तृत समीक्षा की जाएगी तथा उसके क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाएगा। साथ ही मौजूदा सामाजिक–राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नए सुझावों को शामिल कर भोपाल डिक्लेरेशन–2 का प्रारूप तैयार किया जाएगा।

दूसरा दिन | 13 जनवरी 2026

स्थान : समन्वय भवन, भोपाल

दूसरे दिन भोपाल डिक्लेरेशन–2 को लेकर एक व्यापक सार्वजनिक विचार–विमर्श (पब्लिक कंसल्टेशन) आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में देशभर से आए 500 से अधिक बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विषय विशेषज्ञ भाग लेंगे। प्रतिभागियों से सुझाव एवं विचार आमंत्रित किए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार यह प्रक्रिया ओपन कंसल्टेशन का हिस्सा होगी और इसे अंतिम घोषणा नहीं माना जाएगा।आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त सुझावों और विचारों के आधार पर भोपाल डिक्लेरेशन–2 के मसौदे को और परिष्कृत किया जाएगा तथा इसका अंतिम प्रारूप वर्ष 2026 में सार्वजनिक रूप से जारी किया जाएगा। यह घोषणा दलित अधिकार, आरक्षण, शिक्षा, भूमि अधिकार, राजनीतिक भागीदारी एवं संवैधानिक मूल्यों की मजबूती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक साझा राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगी।भोपाल डिक्लेरेशन–2 को सामाजिक न्याय और बहुजन एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में देशव्यापी आंदोलनात्मक एवं नीतिगत पहल को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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