भोपाल में दोपहिया वाहनों पर पीछे बैठने वालों के लिए भी हेलमेट अनिवार्य – 6 नवंबर 2025 से लागू नया नियम,

भोपाल, 6 नवम्बर 2025। सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राजधानी भोपाल में अब दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वाले यात्रियों (4 वर्ष से अधिक आयु) के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम 6 नवम्बर 2025 से लागू हो गया है। यातायात पुलिस द्वारा इस नियम के सख्त पालन के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन करने पर POS मशीन से तत्काल चालान काटा जाएगा तथा बार-बार उल्लंघन करने पर ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किया जा सकेगा।

🚨 नए नियम की मुख्य बातें

  • हेलमेट अनिवार्य: दोपहिया वाहन के चालक के साथ-साथ पीछे बैठने वाले सभी यात्रियों (4 वर्ष से अधिक उम्र के) के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा।
  • सख्त प्रवर्तन: नियम का उल्लंघन करते पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
  • POS मशीन से चालान: चालान की प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल होगी। यातायात पुलिस मौके पर ही POS मशीन से चालान काटकर रसीद देगी।
  • बार-बार उल्लंघन पर कार्रवाई: यदि कोई व्यक्ति बार-बार नियम तोड़ते हुए पकड़ा जाता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस 3 माह के लिए निलंबित किया जा सकता है।
  • पारदर्शिता: सभी ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरे से लैस किया गया है ताकि कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

🎯 नियम का उद्देश्य

इस नए नियम का प्रमुख उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु एवं गंभीर चोटों की संख्या को कम करना है। दोपहिया वाहनों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में सिर की चोटें सबसे अधिक घातक होती हैं। ऐसे में हेलमेट का उपयोग दुर्घटना की स्थिति में जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

🚦 यातायात पुलिस का विशेष अभियान

भोपाल यातायात पुलिस द्वारा शहर के विभिन्न प्रमुख चौराहों, मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में चेकिंग पॉइंट स्थापित किए गए हैं। पुलिसकर्मी नागरिकों को हेलमेट की अनिवार्यता के बारे में जागरूक भी कर रहे हैं। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत चालान की कार्रवाई की जा रही है।

🗣️ पुलिस विभाग की अपील

यातायात पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें, स्वयं हेलमेट पहनें और अपने पीछे बैठने वाले यात्रियों को भी हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करें। विभाग का कहना है कि यह नियम दंड के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए लागू किया गया है।

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