भोपाल, 25 अगस्त 2026। राजधानी भोपाल में मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन ने रोकथाम के लिए अपनी निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। शहर के अलग-अलग इलाकों में मच्छरों के पनपने की वजह बनने वाले जलभराव को लेकर प्रशासन ने नगर निगम को विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शहर में खाली पड़े प्लॉटों, निर्माणाधीन स्थलों और ऐसे स्थानों की लगातार जांच की जाए, जहां बारिश का पानी कई दिनों तक जमा रहता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थान पर लंबे समय तक पानी जमा पाए जाने पर उसका तत्काल निपटारा कराया जाए और संबंधित व्यक्ति या संपत्ति मालिक की लापरवाही सामने आने पर मौके पर ही नियमानुसार जुर्माने की कार्रवाई की जाए। प्रशासन का मानना है कि बारिश के बाद खाली प्लॉटों, टूटे-फूटे कंटेनरों, पुराने टायरों, गड्ढों और अन्य स्थानों पर जमा साफ पानी मच्छरों के प्रजनन का प्रमुख कारण बन सकता है। ऐसे में समय रहते जलभराव को खत्म करना जरूरी है, ताकि डेंगू और मलेरिया के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। कलेक्टर ने नगर निगम और संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अभियान चलाने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की यह सख्ती ऐसे समय में सामने आई है, जब शहर में डेंगू-मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी की जानकारी सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्र में पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, पानी की टंकियों, पुराने बर्तनों और अन्य जलपात्रों की नियमित सफाई करना भी जरूरी बताया गया है। इसके साथ ही बैठक में मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की सेवाओं को आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के दौरान पात्र लोगों को निर्धारित स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिले और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। बैठक में कुपोषित बच्चों की स्थिति को लेकर भी विशेष चिंता जताई गई। कलेक्टर ने कहा कि जिन क्षेत्रों में मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान आयोजित किया जाएगा, वहां चिन्हित कुपोषित बच्चों के फॉलोअप पर विशेष ध्यान दिया जाए। बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और उपचार की स्थिति की नियमित जानकारी ली जाएगी और इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कलेक्टर स्वयं करेंगे। प्रशासन का उद्देश्य केवल बीमारियों की रोकथाम तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी सरकारी सेवाओं को जरूरतमंद परिवारों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना भी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जमीनी स्तर पर जाकर स्थिति का आकलन करें और जहां भी कमी दिखाई दे, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करें। जिला प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे डेंगू-मलेरिया की रोकथाम में प्रशासन का सहयोग करें। घर या आसपास पानी जमा दिखाई देने पर उसे तुरंत साफ करें और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। प्रशासन का कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही मच्छरजनित बीमारियों के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।