बांग्लादेश में आतंक का राज, अल्पसंख्यक और प्रेस स्वतंत्रता गंभीर खतरे में: शेख हसीना,

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि वर्तमान समय में बांग्लादेश “आतंक के राज” से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक पहचान को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है, जिससे समाज का ताना-बाना बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शेख हसीना ने कहा कि आज बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय और स्वतंत्र मीडिया, दोनों ही गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं।एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि दीपू चंद्र दास की हत्या एक “भयानक और शर्मनाक अपराध” है, जो यह साफ दर्शाता है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक कितने असुरक्षित हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगस्त 2024 से हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों, अहमदी मुसलमानों और स्वदेशी समुदायों के खिलाफ हिंसा का एक लगातार सिलसिला देखने को मिला है। यह हिंसा केवल घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की निष्क्रियता, इनकार और चरमपंथियों को दी गई छूट के कारण लगातार बढ़ती जा रही है।शेख हसीना ने कहा कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार में जमात-ए-इस्लामी और उससे जुड़े चरमपंथी समूहों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। यही कारण है कि कट्टरपंथी ताकतें बेखौफ होकर अल्पसंख्यकों और असहमत आवाज़ों को निशाना बना रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा कोई विकल्प नहीं थी, बल्कि यह एक संवैधानिक दायित्व और नैतिक जिम्मेदारी थी।प्रधानमंत्री ने पत्रकारों के खिलाफ हो रही हिंसा और दमन की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूनुस सरकार असहमति को दबाने के लिए पत्रकारों को गिरफ्तार कर रही है और उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। शेख हसीना के अनुसार, उनके शासनकाल में पत्रकार बिना किसी डर, बदले की भावना या हिंसा के स्वतंत्र रूप से लिख सकते थे, लेकिन आज बांग्लादेश में प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हो रहा है।

उस्मान हादी की हत्या पर दुख जताते हुए शेख हसीना ने कहा कि यह एक बेहद दुखद और भयावह घटना थी, जिस पर सरकार को निष्पक्ष और जिम्मेदार प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। इसके विपरीत, उनकी मौत का राजनीतिकरण किया गया, जिससे मीडिया के खिलाफ हिंसा की एक नई लहर फैल गई। उन्होंने कहा कि उस्मान हादी की हत्या अराजकता, चुनावी हिंसा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन का सीधा परिणाम है।शेख हसीना ने इन हालातों के लिए सीधे तौर पर मोहम्मद यूनुस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बांग्लादेश की राजनीति में हिंसा को बढ़ावा मिला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह बांग्लादेश की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दे और अल्पसंख्यकों तथा स्वतंत्र मीडिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाए।गौरतलब है कि शेख हसीना जुलाई 2024 के बाद से भारत में रह रही हैं। उनका कहना है कि बांग्लादेश को एक बार फिर लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और कानून के राज की राह पर लौटाने के लिए वैश्विक स्तर पर जागरूकता और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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