बांग्लादेश की नई सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा कर दिया है। इस क्रम में वरिष्ठ राजनयिक खलीलुर रहमान को देश का नया विदेश मंत्री नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक स्तर पर सकारात्मक संवाद देखने को मिला है।नवनियुक्त विदेश मंत्री खलीलुर रहमान इससे पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। प्रशासनिक और कूटनीतिक अनुभव के चलते उनकी नियुक्ति को क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम माना जा रहा है।भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खलीलुर रहमान को बांग्लादेश का विदेश मंत्री नियुक्त होने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा, “बांग्लादेश के विदेश मंत्री के तौर पर शपथ लेने पर डॉ. खलीलुर रहमान को बधाई। आपसी तरक्की और खुशहाली के लिए हमारे सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की उम्मीद है।”इस पर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने एक्स पर जयशंकर के संदेश को साझा करते हुए लिखा, “बांग्लादेश, नए बने विदेश मंत्री को माननीय भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की बधाई और प्रेमपूर्ण भावनाओं के लिए दिल से आभार व्यक्त करता है। लंबे समय से चली आ रही दोस्ती और दोनों देशों के लोगों के बीच बहुआयामी रिश्तों को ध्यान में रखते हुए ढाका, बांग्लादेश और भारत के बीच आपसी सम्मान, समानता, भरोसे और साझी समृद्धि पर आधारित मजबूत, शांतिपूर्ण और प्रभावी संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की आशा करता है।”खलीलुर रहमान एक अनुभवी राजनयिक हैं। वे कनाडा में बांग्लादेश के उच्चायुक्त (हाई कमिश्नर) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने विदेश मंत्रालय में कोविड-19 महामारी के दौरान चीफ कोऑर्डिनेटर के रूप में अहम भूमिका निभाई थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका अनुभव व्यापक है—वे World Health Organization में कार्य कर चुके हैं।शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो खलीलुर रहमान ने चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की है और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की है। उन्होंने भारत के प्रतिष्ठित Jawaharlal Nehru University से पब्लिक हेल्थ में पीएचडी की उपाधि अर्जित की है। यह शैक्षणिक और पेशेवर अनुभव उन्हें क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीतिक चुनौतियों को समझने में विशेष क्षमता प्रदान करता है।

विश्लेषकों का मानना है कि नई जिम्मेदारी में वे भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विशेष रूप से पड़ोसी देशों के साथ सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीति, आर्थिक साझेदारी और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय जैसे विषयों पर उनकी सक्रियता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के वर्षों में कनेक्टिविटी परियोजनाओं, ऊर्जा सहयोग, सीमा पार व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। दोनों देशों की सरकारें यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि वे आपसी विश्वास और समानता के आधार पर संबंधों को और मजबूत बनाना चाहती हैं।नए विदेश मंत्री की नियुक्ति और दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच सकारात्मक संवाद यह संकेत देता है कि द्विपक्षीय रिश्तों में निरंतरता और सहयोग की भावना बरकरार रहेगी। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठकों और कूटनीतिक संवाद के जरिए संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।