प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया के लिए पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन लाइब्रेरी (Global Traditional Medicine Library – GTML) का शुभारंभ किया। यह पहल भारत की समृद्ध आयुष परंपरा को वैश्विक मंच पर मजबूती देने और पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक व डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों से आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और लोक चिकित्सा जैसी पद्धतियों के माध्यम से मानवता की सेवा करता आ रहा है। ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन लाइब्रेरी इन पारंपरिक उपचार प्रणालियों के ज्ञान को एक साझा वैश्विक मंच प्रदान करेगी, जिससे शोध, शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से दुनियाभर के शोधकर्ता, डॉक्टर, विद्यार्थी और नीति-निर्माता प्रमाणिक जानकारी तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी और इन पद्धतियों की वैज्ञानिक स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। साथ ही, यह कदम पारंपरिक ज्ञान की चोरी और गलत पेटेंट जैसी समस्याओं को रोकने में भी सहायक होगा।
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में पारंपरिक चिकित्सा न केवल उपचार बल्कि रोगों की रोकथाम में भी अहम भूमिका निभा सकती है। भारत की यह पहल “वन अर्थ, वन हेल्थ” की भावना को मजबूत करती है।
ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन लाइब्रेरी को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है, ताकि विभिन्न देशों की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के बीच सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान हो सके। इससे भारत को वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह लाइब्रेरी केवल एक डिजिटल मंच नहीं, बल्कि मानव कल्याण के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संगम का प्रतीक है। यह पहल आने वाले समय में वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।