
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बिजली का महत्व शरीर में प्राणों के समान है। जैसे शरीर के समस्त अंगों और गतिविधियों के संचालन के लिए प्राण आवश्यक होते हैं, वैसे ही किसी भी राज्य की प्रगति, औद्योगिक विकास और जनकल्याण के लिए पर्याप्त विद्युत उपलब्धता अनिवार्य है। मध्यप्रदेश में 60 हजार करोड़ रुपए की लागत से 4,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन के लिए किए गए समझौते प्रदेश के स्थायी और दीर्घकालिक विकास का मजबूत आधार बनेंगे। इन परियोजनाओं से प्रदेश में कुल विद्युत उपलब्धता बढ़ेगी और भविष्य की मांग की शत-प्रतिशत पूर्ति संभव हो सकेगी।मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में 4,000 मेगावॉट बिजली के पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई ने अनुबंधों से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक श्री विशेष गढ़पाले तथा टोरेंट पॉवर लिमिटेड के श्री जिगिश मेहता, अदानी पॉवर लिमिटेड के श्री एस.बी. खिलया और हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के श्री रतुल पुरी के बीच विद्युत आपूर्ति अनुबंधों का आदान-प्रदान हुआ। ये सभी नए पॉवर हाउस अनूपपुर जिले में स्थापित किए जाएंगे। कार्यक्रम के प्रारंभ में उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की उद्योग-मित्र नीतियों, सशक्त अधोसंरचना और सुशासन आधारित व्यवस्था के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश आज देश-विदेश के निवेशकों और बड़े औद्योगिक समूहों की पहली पसंद बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में भूमि, जल, पर्यावरण, कोयला और रेलवे लाइन जैसे महत्वपूर्ण घटकों का बेहतर समन्वय आवश्यक होता है और इन सभी दृष्टियों से मध्यप्रदेश अत्यंत उपयुक्त राज्य है।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य तेजी से अग्रणी बन रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रदेश को मिला पीएम मित्र पार्क राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगा और रोजगार के व्यापक अवसर सृजित करेगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे उद्यमिता, स्वरोजगार और खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य सरकार रोजगारपरक उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दे रही है और औद्योगिक विस्तार के लिए प्रदेश में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने राज्य में स्थापित किए जाने वाले नए विद्युत संयंत्रों से डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट (डीबीएफओओ) मॉडल के अंतर्गत बिजली की खरीद के लिए विद्युत दर आधारित प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से 3,200 मेगावॉट बिजली खरीद हेतु बोलियां आमंत्रित की थीं। इसमें ग्रीन शू विकल्प के तहत अतिरिक्त 800 मेगावॉट बिजली खरीद का प्रावधान भी शामिल था।
बोली प्रक्रिया के अंतर्गत मेसर्स हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को 800 मेगावॉट, मेसर्स टोरेंट पॉवर लिमिटेड को 1,600 मेगावॉट तथा मेसर्स अदानी पॉवर लिमिटेड को 800 मेगावॉट क्षमता आवंटित की गई। इसके अतिरिक्त ग्रीन शू विकल्प के अंतर्गत अदानी पॉवर लिमिटेड को अतिरिक्त 800 मेगावॉट क्षमता प्रदान की गई है। टोरेंट पॉवर द्वारा 24 हजार करोड़ रुपए, अदानी पॉवर द्वारा 24 हजार करोड़ रुपए तथा हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स द्वारा 12 हजार करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव किया गया है।इन सभी क्षमताओं के लिए चयनित विकासकों द्वारा गठित स्पेशल पर्पस व्हीकल्स के साथ विद्युत आपूर्ति अनुबंध किए गए हैं। इन परियोजनाओं से लगभग 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा। विद्युत आपूर्ति अनुबंधों के अंतर्गत वर्ष 2030 से बिजली आपूर्ति शुरू होने की संभावना है। यह परियोजनाएं न केवल प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेंगी, बल्कि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को भी नई गति प्रदान करेंगी।