
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की आत्मा सदियों से स्थानीय स्वशासन में निहित रही है। भारतीय चिंतन में गांव को स्वराज, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक विकास की प्रथम इकाई माना गया है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का जो दृष्टिकोण देश के सामने रखा है, उसकी मूल शक्ति पंचायतें और गांवों की सामूहिक भागीदारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजधानी स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “आत्मनिर्भर पंचायत–समृद्ध मध्यप्रदेश” विषयक राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यशाला पंचायतों को प्रशासनिक रूप से दक्ष, वित्तीय रूप से सक्षम और सामुदायिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की व्यापक रणनीति तैयार करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार पंचायत संस्थाओं को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि अभी तक जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के उपाध्यक्ष शिक्षा समितियों के अध्यक्ष तो होते हैं, पर निरीक्षण प्रक्रिया में उनके सुझावों को महत्व नहीं दिया जाता था। लेकिन अब शासन ने निर्णय लिया है कि निरीक्षण के दौरान दिए गए सभी सुझावों को लिपिबद्ध किया जाएगा और उन पर शासन स्तर से कार्रवाई भी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरपंचों को पंचायत गतिविधियों के लिए 25 लाख रुपये तक की राशि खर्च करने का अधिकार दिया गया है। यह मात्र शुरुआत है, आने वाले समय में पंचायतों को और अधिक अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलन से की। इसके बाद प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना—वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत वाटरशेड महोत्सव का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री ने जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगी संस्थाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का प्रतिनिधियों के साथ समूह चित्र भी लिया गया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह प्रदान किया। कार्यशाला में पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह, बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि, विषय-विशेषज्ञ और अधिकारी उपस्थित रहे। यह कार्यशाला 26 नवंबर तक चलेगी।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुरस्कार प्राप्त अधिकारियों और संस्थाओं को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पंचायतों को पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का अधिकार भी दिया है। पंचायतों को निवेश और निवास की बेहतर व्यवस्था के लिए मास्टर प्लान तैयार करना चाहिए। इसकी शुरुआत विदिशा जिले से की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए तीन से पाँच हॉर्सपावर तक के सोलर पंपों पर 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है। पंचायतें इस योजना को गांव–गांव तक पहुंचाकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग कर सकती हैं।मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पंचायतों के माध्यम से “एक बगिया मां के नाम” योजना की शुरुआत की गई है। यह योजना गांवों के पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जिला पंचायत प्रतिनिधियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पंचायतों को सशक्त बनाने का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से कुशाभाऊ ठाकरे सभागार विधानसभा सत्रों का केंद्र रहा है। आज पंचायत प्रतिनिधियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि लोकतंत्र की जड़ें गांवों में कितनी मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि पंचायत प्रतिनिधि आगे चलकर नई विधानसभा तक पहुंचें और राज्य के नीति-निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। डॉ. यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान में पंचायतों की आत्मनिर्भरता प्रमुख स्तंभ है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था के बेहतर क्रियान्वयन के लिए यह कार्यशाला महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता तभी बढ़ सकती है, जब पंचायत प्रतिनिधियों और जिला–जनपद स्तर के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश की हर पंचायत में दिसम्बर 2026 तक शमशान घाट और सभी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि पाँचवें वित्त आयोग की राशि बढ़ाकर 6 हजार करोड़ रुपये की गई है, जिससे पंचायतों के विकास कार्यों को मजबूती मिली है। प्रधानमंत्री जनमन और प्रधानमंत्री आवास योजनाओं में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है।श्री पटेल ने कहा कि आत्मनिर्भर पंचायत का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं है, बल्कि गांवों में स्वच्छता, नशामुक्ति, स्वास्थ्य, सौहार्द और सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन में सामूहिक प्रयास भी आवश्यक हैं। ग्राम पंचायतों को आपसी विवादों और सामाजिक समस्याओं को सामूहिक नीयत से हल करने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए।कार्यक्रम में जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया। समग्र श्रेणी में खण्डवा प्रथम, रायसेन द्वितीय और बालाघाट तृतीय स्थान पर रहे। खेत तालाब निर्माण में अनूपपुर और बालाघाट को सम्मानित किया गया, वहीं जनपद स्तर पर अनूपपुर के पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत को प्रथम स्थान मिला। सहयोगी संस्थानों में एमपी रोजगार गारंटी परिषद, राजीव गांधी जलग्रहण मिशन, एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और नॉलेज पार्टनर संस्थाएं ‘प्रदान’ और ‘टीआरआई’ को सम्मानित किया गया।इस प्रकार यह कार्यशाला पंचायतों की आत्मनिर्भरता और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो रही है।