पाकिस्तान द्वारा आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) के गठन और इसके क्षेत्रीय प्रभावों पर भारतीय दृष्टिकोण,

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) के गठन की घोषणा ने दक्षिण एशिया में सुरक्षा संतुलन और रणनीतिक स्थिरता पर गहरी चिंता उत्पन्न की है। यह कदम मई 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद उठाया गया है, जिसमें पाकिस्तान भारतीय मिसाइल हमलों और प्रत्युत्तर क्षमता को प्रभावी रूप से चुनौती देने में विफल रहा था।

पृष्ठभूमि

मई 2025 के संघर्ष के दौरान:

  • पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ फतह सीरीज बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया, जिसे भारत ने हरियाणा के सिरसा के पास सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर मार गिराया।
  • भारत ने स्कैल्प और ब्रह्मोस जैसी प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलों का प्रभावी उपयोग किया, जिनका पाकिस्तान कोई ठोस जवाब देने में असमर्थ रहा।
  • पाकिस्तान का मिसाइल ढांचा “डुअल-कैपेबल” होने के बावजूद मुख्य रूप से न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी द्वारा नियंत्रित था, जिससे पारंपरिक मिसाइल विकल्प अत्यंत सीमित थे।

ARFC गठन का उद्देश्य

पाकिस्तान ने पहली बार पारंपरिक मिसाइलों के लिए अलग कमांड संरचना—ARFC—बनाई है।
ARFC का दावा है कि:

  • पारंपरिक मिसाइलों का तेज़ और केंद्रीकृत उपयोग संभव होगा,
  • परमाणु हथियारों के आकस्मिक उपयोग की संभावना कम होगी,
  • और भविष्य के संघर्षों में पाकिस्तान अधिक प्रभावी जवाब दे सकेगा।

पाकिस्तानी विश्लेषक अली मुस्तफा के अनुसार, पाकिस्तान मई 2025 में चाहकर भी मिसाइलों का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाया था और ARFC इसी कमजोरी को दूर करने हेतु बनाई गई है। भविष्य के हमलों में पाकिस्तान बाबर, फतह और संभावित हाइपरसोनिक मिसाइलों के उपयोग की योजना बना सकता है।

ARFC के रणनीतिक परिणाम

हालांकि पाकिस्तान दावा कर रहा है कि ARFC परमाणु जोखिम कम करेगी, परंतु कई विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि:

  1. संकट को अधिक खतरनाक बना सकता है
    यदि पाकिस्तान भविष्य में संघर्ष की शुरुआत बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से करता है—जैसा कि संकेत मिल रहे हैं—तो भारत की प्रतिकार क्षमता अत्यंत सशक्त है। इससे बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका बढ़ जाएगी।
  2. भारत का पलटवार अधिक प्रचंड होगा
    भारत की मिसाइल और एयर-स्ट्राइक क्षमता पहले ही सिद्ध हो चुकी है, और किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब निर्णायक होगा।
  3. पाकिस्तान के पास प्रभावी “क्राइसिस मैनेजमेंट सिस्टम” नहीं
    इससे किसी भी मिसाइल-आधारित संघर्ष का जोखिम अनियंत्रित रूप से बढ़ जाएगा।
  4. आर्थिक लक्ष्यों पर हमले का संकेत खतरनाक
    पाकिस्तानी विश्लेषकों द्वारा भारत के आर्थिक केंद्रों पर हमले की सलाह क्षेत्रीय शांति के लिए बेहद गंभीर खतरा है।

भारत का आधिकारिक दृष्टिकोण

भारत स्पष्ट करता है कि:

  • देश अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
  • भारत की मिसाइल रक्षा प्रणाली, प्रिसिजन-स्टाइक क्षमता और प्रतिरोधक शक्ति किसी भी परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है।
  • क्षेत्रीय शांति और स्थिरता सर्वोच्च प्राथमिकता है, परंतु भारत की सैन्य प्रतिक्रिया किसी भी आक्रामक मिसाइल हमले का कठोर और निर्णायक जवाब देगी।

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