
नेपाल में जेनरेशन-जी प्रदर्शनकारियों ने जोरदार आंदोलन के बाद केपी शर्मा ओली की सत्ता को उखाड़ फेंका। राजधानी काठमांडू सहित कई हिस्सों में हिंसा और अराजकता देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने संसद, सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री आवास और राष्ट्रपति भवन को आग के हवाले कर दिया। हालात बिगड़ने पर नेपाली सेना ने मोर्चा संभाला, जिसके बाद कुछ हद तक स्थिति पर नियंत्रण पाया गया।सूत्रों के अनुसार, जेनरेशन-जी नेताओं ने सेना प्रमुख और राष्ट्रपति से बातचीत के दौरान कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें संसद को भंग करना, शीघ्र चुनाव करवाना और गैर-राजनीतिक व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करना शामिल है। इसके साथ ही आंदोलनकारी नेपाल के मौजूदा संविधान में बदलाव की मांग भी कर रहे हैं।इसी बीच, नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने गुरुवार दोपहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए बयान जारी किया। राष्ट्रपति ने आश्वासन दिया कि वह संविधान के दायरे में रहकर देश के राजनीतिक संकट का समाधान खोजने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता की चिंताओं का समाधान लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर ही किया जाएगा।
राष्ट्रपति पौडेल ने कहा, “मैं सभी पक्षों से अपील करता हूँ कि वे आश्वस्त रहें कि प्रदर्शनकारियों की मांगों का शीघ्र समाधान करने के प्रयास जारी हैं। साथ ही सभी नागरिक अनुशासित तरीके से शांति-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।”राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल का यह संकट लंबे समय तक खिंच सकता है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों की मांगें न सिर्फ मौजूदा सरकार बल्कि पूरे संवैधानिक ढांचे को चुनौती देती हैं। आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।