राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि दीन-दुखियों और पीड़ित मानवता की सेवा ईश्वर की सच्ची सेवा है। यह सेवा करने का अवसर बिरले और सौभाग्यशाली लोगों को ही प्राप्त होता है। चिकित्सक पीड़ित मानवता के सच्चे सेवक होते हैं और रोगियों के लिए वे भगवान का स्वरूप होते हैं। उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान चिकित्सक का मरीजों के साथ व्यवहार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। चिकित्सक की आत्मीयता, सरलता और सहजता मरीज के मनोविज्ञान एवं उपचार प्रक्रिया को सकारात्मक दिशा देती है। इसलिए चिकित्सकों को चाहिए कि वे मरीजों की पीड़ा को धैर्यपूर्वक सुनें और संवेदनशीलता के साथ उनका इलाज करें।राज्यपाल श्री पटेल गुरुवार को भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र (बी.एम.एच.आर.सी.) में आयोजित चौथे इंटरनेशनल स्कूल ऑन रेडिएशन रिसर्च के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि यह आयोजन केवल वैज्ञानिक विमर्श का मंच नहीं है, बल्कि मानवता के भविष्य को अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और आशावान बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। उन्होंने मानवता की सेवा हेतु ज्ञान-विज्ञान के प्रसार के लिए किए जा रहे इस आयोजन से जुड़ी सभी सहयोगी संस्थाओं को बधाई दी। साथ ही बी.एम.एच.आर.सी. की साइटोजेनेटिक प्रयोगशाला को इंडियन बायोडोसिमीट्री नेटवर्क की छह चयनित प्रयोगशालाओं में शामिल किए जाने पर शुभकामनाएं दीं।राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि जब विज्ञान करुणा, उत्तरदायित्व और मानव कल्याण के उद्देश्य से जुड़ता है, तब वह केवल उपचार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जीवन की गुणवत्ता और मानवता के विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन के दौरान होने वाले विचार-विमर्श, वैज्ञानिक चर्चाएं, शोध पत्र, पोस्टर एवं तकनीकी प्रस्तुतियां चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगी। इससे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक सहयोग, ज्ञान-साझेदारी और दीर्घकालिक अनुसंधान सहभागिता को प्रोत्साहन मिलेगा।राज्यपाल श्री पटेल ने युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे नवीनतम वैज्ञानिक उपलब्धियों से जुड़ें, अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ खुलकर ज्ञान का आदान-प्रदान करें और अनुसंधान को सीमाओं से परे ले जाकर मानवता की सेवा करें।उन्होंने कहा कि डीएनए रिपेयर तंत्र, आनुवंशिक परिवर्तनों तथा नवीन रेडिएशन आधारित उपचार विधियों पर केंद्रित यह वैज्ञानिक चर्चा मानव शरीर की जटिलताओं को समझने और रोग उपचार को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी। यह विमर्श सिकल सेल एनीमिया जैसे वंशानुगत रोगों से मानवता को मुक्त करने की दिशा में आशा और विश्वास की नई किरण है। रेडिएशन के जैविक प्रभाव, बायोमार्कर्स के वैज्ञानिक उपयोग तथा रेडियोथेरेपी की उन्नत तकनीकों पर गहन चर्चा चिकित्सा विज्ञान को अधिक सटीक, सुरक्षित और सुलभ बनाएगी।

कार्यक्रम में सोसायटी ऑफ रेडिएशन रिसर्च के संस्थापक अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के.पी. मिश्रा तथा न्यूक्लियर साइंस एवं टेक्नोलॉजी और भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के डॉ. अमित कुमार ने विकिरण विज्ञान और रेडियोलॉजी के क्षेत्र में मानव स्वास्थ्य से जुड़े नवीनतम विकास, संभावनाओं और चुनौतियों पर अपने विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर राज्यपाल श्री पटेल ने कैलेण्डर और पुस्तिका का लोकार्पण भी किया। बी.एम.एच.आर.सी. की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए देश-विदेश से जुड़े वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों के योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रभारी चिकित्सक डॉ. अनुराग यादव सहित देश-विदेश के वैज्ञानिक, चिकित्सक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।