रांची। झारखंड हाई कोर्ट में सोमवार को एक अहम जनहित याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें राज्य में लंबे समय से रिक्त चल रहे संवैधानिक पदों जैसे लोकायुक्त, सूचना आयुक्त, महिला आयोग अध्यक्ष एवं अन्य पदों पर नियुक्ति की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को इन सभी पदों पर आगामी अगस्त माह तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता श्री राजीव रंजन ने अदालत को सूचित किया कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति हाल ही में की गई है, जोकि कई नियुक्तियों के लिए आवश्यक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ संवैधानिक पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और शेष पदों पर भी जल्द निर्णय लिया जाएगा। महाधिवक्ता ने कोर्ट से इस संबंध में और समय की मांग की, जिससे सरकार प्रक्रिया को पूरी कर सके।गौरतलब है कि राज्य में लोकायुक्त, राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष, सूचना आयुक्त और अन्य कई महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पिछले कई महीनों से खाली पड़े हैं। इन पदों के रिक्त रहने से न केवल प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम जनता को न्याय एवं राहत मिलने में भी देरी हो रही है। हजारों आवेदन, शिकायतें और अपीलें लंबित हैं जिन्हें संबंधित अधिकारियों के अभाव में निपटाया नहीं जा सका है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार नियुक्ति प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं ले रही है। इससे आम जनता के मौलिक अधिकारों और पारदर्शिता से जुड़े संवैधानिक मूल्यों का हनन हो रहा है।अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार को इस दिशा में ठोस और त्वरित कदम उठाने होंगे। अदालत ने चेताया कि यदि निर्देशित समय सीमा तक नियुक्तियां नहीं की गईं तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और सरकार को कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।