
मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय कल्याण के लिये किये जा रहे कार्यों की जानकारी समुदाय तक पारदर्शी रूप से पहुँचाई जाए और इसके लिये निरंतर प्रयास किए जाएँ। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी जिलों में गौरव दिवस का आयोजन सुनिश्चित किया जाए ताकि समाज में जागरूकता और भागीदारी बढ़ सके।राज्यपाल श्री पटेल शुक्रवार को राजभवन में आयोजित बैठक में गृह, जेल, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। बैठक दो सत्रों में संपन्न हुई। पहले सत्र में गृह, जेल एवं वन विभाग से संबंधित मुद्दों की समीक्षा की गई। दूसरे सत्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री जन-मन योजना की प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई।
जनजातीय गौरव दिवस पर बंदियों की रिहाई
राज्यपाल ने राज्य सरकार की इस पहल की सराहना की कि अच्छा आचरण करने वाले बंदियों की रिहाई के लिये वर्ष में निर्धारित 4 अवसरों — 26 जनवरी, 14 अप्रैल, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर — के साथ 15 नवम्बर राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस को भी शामिल किया गया है। यह देश में पहली बार होगा जब जनजातीय गौरव दिवस पर भी बंदियों की रिहाई होगी। इस वर्ष इस अवसर पर 29 बंदियों को रिहा करने का प्रस्ताव है, जिनमें 8 अनुसूचित जनजाति वर्ग के बंदी शामिल हैं।उन्होंने कहा कि जेल विभाग मुक्त बंदियों के सामाजिक पुनर्वास और आश्रित परिवारों की सहायता के लिये समाज कल्याण विभाग के साथ समन्वय कर नीतिगत व्यवस्था तैयार करे।
राज्यपाल को बताया गया कि अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध दर्ज कई प्रकरणों को शासन ने वापस लेने का निर्णय लिया है। विशेष रूप से जिन प्रकरणों में अतिक्रमण हटा लिया गया है, उन्हें समाप्त किया जाएगा। 3 मार्च 2009 की स्थिति में वन अपराध से जुड़े कुल 87,549 प्रकरणों को शासन द्वारा वापस ले लिया गया है। वहीं, पिछले 10 वर्षों में दर्ज 35,807 प्रकरणों में से 28,645 का निराकरण किया जा चुका है और 4,396 प्रकरण न्यायालयों में विचाराधीन हैं।राज्यपाल ने प्रधानमंत्री जन-मन आवास योजना के अंतर्गत बनने वाले घरों में बिजली, प्रकाश और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में यह भी बताया गया कि पेसा एक्ट के तहत गठित 492 ग्राम सभाओं के साथ ही 735 नये आवेदन ग्राम सभाओं के गठन हेतु प्राप्त हुए हैं।वर्ष 2025 के दौरान अब तक गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर कुल 523 बंदियों को रिहा किया जा चुका है।