देश के उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो गया है। श्री धनखड़ ने बीते सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया। उनका कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त होना था, लेकिन बीच में ही पद छोड़ने से अब देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर चुनाव की प्रक्रिया अनिवार्य हो गई है।

चुनाव आयोग ने की तैयारी की शुरुआत
बुधवार को चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए आवश्यक सभी प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आयोग ने बताया कि संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के निर्वाचित और नामित सदस्यों को मिलाकर बनने वाले निर्वाचन मंडल की सूची तैयार की जा रही है। इसके साथ ही निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति और मतगणना संबंधी व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आयोग ने यह भी कहा कि सभी तैयारियां पूरी होते ही उपराष्ट्रपति चुनाव का कार्यक्रम सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित एवं नामित सदस्यों द्वारा किया जाता है। मतदान गोपनीय मतपत्र द्वारा एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote System) से होता है। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, किंतु कार्यकाल पूर्ण होने से पहले स्वास्थ्य, व्यक्तिगत कारणों या किसी अन्य वैधानिक कारण से इस्तीफा दिया जा सकता है। श्री जगदीप धनखड़ ने भी स्वास्थ्य कारणों से ही पद त्यागने का निर्णय लिया।
सियासी हलचल और अटकलें तेज
उपराष्ट्रपति पद रिक्त होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अगले उपराष्ट्रपति कौन होंगे, इसे लेकर अलग-अलग दलों और नेताओं के बीच चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष संभावित उम्मीदवारों को लेकर रणनीति बनाने में जुट गए हैं। यह चुनाव न केवल संसदीय समीकरणों को प्रभावित करेगा बल्कि आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर भी असर डाल सकता है।
जल्द होगी आधिकारिक घोषणा
चुनाव आयोग ने संकेत दिए हैं कि सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएंगी और जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी जाएगी। इसके अंतर्गत नामांकन दाखिल करने की तिथियां, नामांकन पत्रों की जांच, उम्मीदवारों की अंतिम सूची और मतदान की तिथि घोषित की जाएगी। सामान्यतः उपराष्ट्रपति पद रिक्त होने के छह माह के भीतर चुनाव कराना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।
पद की संवैधानिक महत्ता
उपराष्ट्रपति न केवल देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर होते हैं बल्कि राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं। उनकी भूमिका संसद की कार्यवाही को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने और संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण रहती है।चुनाव आयोग की तैयारियों और सियासी अटकलों के बीच देश की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। आयोग का कहना है कि समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी।