
छिंदवाड़ा जिले सहित आस-पास के क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के साथ हो रहे अन्याय, शोषण और दमन की घटनाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया गया है। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने निम्नलिखित मांगों को लेकर प्रशासन से तत्काल और कठोर कार्रवाई की माँग की है:
- आदिवासियों की भूमि की अवैध खरीदी पर रोक:
छिंदवाड़ा जिले में आदिवासियों की भूमि गैर-आदिवासियों द्वारा शासन-प्रशासन की मिलीभगत से खरीदी जा रही है। इस पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। - बाँध निर्माण पर रोक:
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बड़े-बड़े बाँध बनाकर आदिवासियों को विस्थापित किया जा रहा है। इन निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभावों का पुनः मूल्यांकन किया जाए। - वन भूमि पर काबिज आदिवासियों को अधिकार:
वर्षों से वन भूमि पर निवासरत आदिवासियों की भूमि का पुनः परीक्षण कर उन्हें वैधानिक पट्टे प्रदान किए जाएँ। - यूरिया खाद की उपलब्धता:
छिंदवाड़ा जिले में किसानों को उचित दाम पर यूरिया खाद नहीं मिल रही है। प्रशासन तत्काल खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करे। - आदिवासी भाऊराव उइके की हत्या की निष्पक्ष जाँच:
पांढुर्णा जिले में शराब ठेकेदार और पुलिस की मिलीभगत से आदिवासी भाऊराव उइके की हत्या कर दी गई। इस घटना की निष्पक्ष जांच कर परिवार को न्याय दिलाया जाए। परिवार को उचित मुआवजा और एक सदस्य को शासकीय नौकरी दी जाए। - थुयेपानी में अपमानजनक घटना पर कठोर कार्रवाई:
हर्रई के थुयेपानी में एक आदिवासी युवक के ऊपर दबंगों द्वारा पेशाब की गई। यह अमानवीय कृत्य है। आरोपियों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त किया जाए। - वन विभाग कर्मचारी को बर्खास्त किया जाए:
बिछुआ में वन विभाग के एक कर्मचारी द्वारा आदिवासी युवक के साथ की गई बेरहमी से मारपीट की घटना निंदनीय है। ऐसे कर्मचारी को तुरंत बर्खास्त किया जाए। - बलात्कार आरोपियों के घर पर कार्रवाई की माँग:
तामिया एवं नवेगांव में नाबालिग आदिवासी युवतियों से हुए बलात्कार के मामलों में अब तक आरोपियों के घरों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। शासन अन्य मामलों की तरह इनके घरों को भी बुलडोजर से ध्वस्त करने का आदेश दे।
हम माँग करते हैं कि शासन-प्रशासन उपरोक्त सभी मामलों में त्वरित संज्ञान ले और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए।