चीन–ताइवान तनाव: एशिया में बढ़ती सैन्य बेचैनी,

पूर्वी एशिया में चीन और ताइवान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुँच गया है। चीन ने ताइवान के चारों ओर समुद्र और हवाई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास (Military Drills) शुरू किए हैं। इन अभ्यासों में युद्धपोत, लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम और लाइव-फायर ड्रिल शामिल हैं। चीन का कहना है कि यह अभ्यास उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हैं, जबकि ताइवान ने इसे सीधे तौर पर अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।चीन लंबे समय से ताइवान को अपना अविभाज्य हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश मानता है। इसी मतभेद के कारण दोनों के बीच दशकों से तनाव बना हुआ है। हाल के वर्षों में यह तनाव और बढ़ गया है, खासकर तब से जब अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ताइवान के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं।ताजा घटनाक्रम में चीन ने ताइवान के आसपास ऐसे सैन्य अभ्यास किए, जिन्हें विशेषज्ञ “घेराबंदी की रणनीति” (Blockade Simulation) के रूप में देख रहे हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य ताइवान पर दबाव बनाना और यह संदेश देना है कि चीन किसी भी स्थिति में सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। इसके जवाब में ताइवान की सेना ने रैपिड रिस्पॉन्स एक्सरसाइज शुरू की है और अपनी वायुसेना व नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा है।ताइवान सरकार ने चीन की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि वह किसी भी तरह की आक्रामकता का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चीनी लड़ाकू विमानों ने कई बार उसके एयर डिफेंस जोन में प्रवेश किया, जिसे गंभीर उकसावे की कार्रवाई माना जा रहा है।इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। अमेरिका ने ताइवान के प्रति अपने समर्थन को दोहराते हुए कहा है कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है। जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों ने भी चिंता जताई है कि यदि यह तनाव बढ़ता है, तो इसका असर पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि चीन फिलहाल सीधे युद्ध के बजाय सैन्य दबाव और मनोवैज्ञानिक रणनीति के जरिए ताइवान को झुकाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, किसी भी छोटी गलती या गलत आकलन से हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं।कुल मिलाकर, चीन–ताइवान तनाव न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाते हैं या फिर हालात और अधिक गंभीर रूप लेते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *