बॉलीवुड के मशहूर हास्य अभिनेता राजपाल यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद जेल में आत्मसमर्पण कर दिया है। यह मामला चेक बाउंस से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने उन्हें सजा सुनाई थी। लंबे समय से चल रहे इस प्रकरण में अदालत ने कई अवसर देने के बाद अंततः सरेंडर का आदेश जारी किया था।जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके बाद कर्ज की अदायगी में देरी हुई और अभिनेता की ओर से दिए गए चेक बाउंस हो गए।इसके बाद संबंधित कंपनी ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत अदालत में मामला दर्ज कराया। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के बाद राजपाल यादव को 6 महीने की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा को निलंबित करते हुए उन्हें समझौते का अवसर दिया था।अदालत के निर्देशों के बावजूद राजपाल यादव कई बार समझौते की शर्तों का पालन नहीं कर सके। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने उन्हें कई बार समय दिया, लेकिन बार-बार डिफॉल्ट होने के कारण अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।

अंततः कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी 2026 तक आत्मसमर्पण करने का अंतिम आदेश जारी किया।सुनवाई के दौरान अभिनेता की ओर से एक सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत मांगी गई थी और 50 लाख रुपये की व्यवस्था करने का दावा भी किया गया था, लेकिन अदालत ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बार-बार शर्तों का उल्लंघन होने पर अब किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।इसके बाद राजपाल यादव ने अदालत में कहा कि वे उसी दिन आत्मसमर्पण करेंगे। आदेश के अनुसार उन्होंने जेल में सरेंडर कर दिया। अब यह स्पष्ट नहीं है कि वे पूरी सजा काटेंगे या आगे किसी कानूनी विकल्प का सहारा लेंगे।फिल्म उद्योग में अपने हास्य अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले राजपाल यादव के लिए यह घटनाक्रम एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अदालत के इस फैसले ने यह संदेश भी दिया है कि वित्तीय मामलों में कानूनी जिम्मेदारियों की अनदेखी करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।