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ग्रामीण सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव,

Dr. Mohan Yadav ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों को मजबूत किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाए तथा वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हुए समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य किए जाएं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को समत्व भवन में Panchayat and Rural Development Department Madhya Pradesh की “सुगम संपर्कता परियोजना” की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि “सिपरी” सॉफ्टवेयर का उपयोग न केवल डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने में हो रहा है, बल्कि सड़कों के साथ पुल-पुलियों और कल्वर्ट की आवश्यकता निर्धारित करने में भी यह अत्यंत उपयोगी साबित हो रहा है।बैठक में जानकारी दी गई कि इस परियोजना के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसका उद्देश्य 100 से अधिक आबादी वाले मजरों-टोलों को सड़क सुविधा से जोड़ना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रारंभ किए गए Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan की साप्ताहिक समीक्षा करने के निर्देश भी दिए। साथ ही “एक बगिया मां के नाम” अभियान के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की जानकारी लेते हुए उन्होंने आमजन की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • “सुगम संपर्कता परियोजना” के माध्यम से गांवों और ग्राम पंचायतों को दोहरी संपर्कता प्रदान की जाएगी।
  • सड़कों का निर्माण मनरेगा (वीबी-जी-राम-जी योजना) के तहत किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक जनपद पंचायत को 3 करोड़ रुपये तक की स्वीकृति देने का अधिकार होगा।
  • पूर्व में निर्मित सड़कों की जियो-इंवेंट्री “रिम्स पोर्टल” के माध्यम से की जा रही है, जिससे नई सड़कों के चयन में दोहराव नहीं होगा।
  • अब तक 33,655 में से 17,437 सड़कों की जियो-इंवेंट्री पूरी की जा चुकी है, जबकि 9 जिलों में 80% से अधिक सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका है।
  • रतलाम, जबलपुर, आगर-मालवा, मंदसौर और पन्ना जिले इस कार्य में अग्रणी हैं।
  • परियोजना के अंतर्गत 7,135 नई सड़कों के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं, जिनमें से 29 जिलों में 1,771 सड़कों को जिला स्तर पर स्वीकृति मिल चुकी है।

परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तकनीकी स्टाफ और अभियंताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 2100 से अधिक तकनीकी कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। साथ ही सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों को भी निर्माण कार्यों के तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन तकनीक और डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से जनपद, जिला और राज्य स्तर पर नियमित निगरानी की जाए।

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