इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई पर गहरी चिंता जताते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि इस दिशा में कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्रीनलैंड पर सैन्य हमला किसी भी पक्ष के लिए अच्छे परिणाम नहीं लाएगा और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। मेलोनी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की ओर से ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर आक्रामक बयान दिए जा रहे हैं।प्रधानमंत्री मेलोनी ने शुक्रवार को नए साल के अवसर पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका और ग्रीनलैंड से जुड़े मुद्दे पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “मुझे यह विश्वास नहीं होता कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल करेगा। ग्रीनलैंड में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई किसी के हित में नहीं होगी और इसका नाटो (NATO) पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए।मेलोनी ने यह भी कहा कि अमेरिका की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन उनका समाधान सैन्य टकराव नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि आर्कटिक क्षेत्र में नाटो की भूमिका को और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और किसी भी देश को एकतरफा कदम उठाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इटली किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं करेगा और शांति पूर्ण समाधान के पक्ष में खड़ा रहेगा।इस बीच, व्हाइट हाउस की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान ने यूरोप में चिंता और बढ़ा दी है। बयान में कहा गया कि अमेरिकी प्रशासन ग्रीनलैंड को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इन विकल्पों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और खनिज संसाधनों से समृद्ध इस द्वीप पर नियंत्रण के लिए सैन्य कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। इस बयान के बाद डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है।ग्रीनलैंड उत्तरी अटलांटिक महासागर और आर्कटिक सागर के बीच स्थित दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। भौगोलिक रूप से यह उत्तरी अमेरिका का हिस्सा माना जाता है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से यह डेनमार्क के अधीन है। द्वीप की रक्षा और विदेश नीति का जिम्मा डेनमार्क सरकार के पास है। ग्रीनलैंड की कुल आबादी लगभग 57,000 है, लेकिन इसके विशाल भू-भाग और प्राकृतिक संसाधनों के कारण इसका रणनीतिक महत्व बेहद अधिक है।

अमेरिका लंबे समय से ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा जताता रहा है, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर सबसे आक्रामक रुख अपनाया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि चीन और रूस आर्कटिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यहां तक कहा है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए किसी भी विकल्प से पीछे नहीं हटेंगे।हालांकि, यूरोपीय देशों में इस बयानबाजी को लेकर गंभीर चिंता है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान सैन्य टकराव के बजाय अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए निकाला जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित पक्ष संयम बरतेंगे और ग्रीनलैंड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता देंगे।