राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर लोकभवन को आम नागरिकों के भ्रमण के लिए तीन दिनों तक खोला जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत नागरिकों को लोकभवन के अवलोकन का अवसर मिलेगा, साथ ही उनके लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लघु फिल्मों के प्रदर्शन एवं चित्र प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा।राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ना तथा गणतंत्र दिवस के महत्व को और अधिक सशक्त एवं जीवंत बनाना है। गणतंत्र दिवस के दिन विशेष कार्यक्रमों और औपचारिक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए लोकभवन भ्रमण का समय सीमित रखा गया है।भ्रमण के दौरान नागरिकों के लिए लोकभवन परिसर में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनके माध्यम से देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें संविधान, लोकतंत्र, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को प्रस्तुत किया जाएगा। आमजनों के लिए एक चित्र प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें प्रदेश और देश के विकास, प्रशासनिक कार्यप्रणाली तथा गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाया जाएगाउन्होंने कहा कि लोकभवन जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक परिसर को जनता के लिए खोलना लोकतंत्र की पारदर्शिता और सहभागिता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।डॉ. कोठारी ने बताया कि नागरिक 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक निर्धारित समय में लोकभवन का भ्रमण कर सकेंगे। भ्रमण की समय-सारिणी इस प्रकार निर्धारित की गई है—
- 25 जनवरी 2026 (रविवार): अपरान्ह 2 बजे से सायं 8 बजे तक
- 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस): प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक
- 27 जनवरी 2026 (मंगलवार): अपरान्ह 2 बजे से सायं 8 बजे तक

।प्रमुख सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि आम नागरिकों की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोकभवन में प्रवेश एवं निकास की व्यवस्था केवल गेट क्रमांक-1 से ही सुनिश्चित की गई है। भ्रमण के दौरान सभी नागरिकों से सुरक्षा नियमों एवं प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के मार्गदर्शन में आयोजित यह पहल न केवल गणतंत्र दिवस के उत्सव को व्यापक स्वरूप देगी, बल्कि नागरिकों को लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति और अधिक जागरूक एवं संवेदनशील बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी।