गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के तत्वाधान में जिला सिंगरौली के बंधा कोल ब्लॉक तेंदुहा पंचायत में दिनांक 12/11/2025 से लगातार चल रहा है ।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेतृत्व में आदिवासी, एसटी, एससी, ओबीसी एवं वंचित वर्गों के संवैधानिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा हेतु “भूमि–माटी बचाओ सत्याग्रह आंदोलन” प्रदेश में व्यापक जन–समर्थन प्राप्त कर रहा है। यह आंदोलन उन अन्यायपूर्ण नीतियों और प्रशासन–कंपनी गठजोड़ के विरुद्ध है, जो आदिवासी समुदायों की भूमि, संस्कृति, परंपरा, और अस्तित्व पर लगातार प्रहार कर रहे हैं।
मुख्य आधार और कानूनी संदर्भ
- वन अधिकार अधिनियम 2006 (FRA) का उल्लंघन
व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों प्रकार के वनाधिकारों को वैधानिक मान्यता देते हुए यह कानून ग्राम सभा को सर्वोच्च अधिकार प्रदान करता है।
इसके बावजूद ग्राम सभाओं की अनुमति के बिना खनन, भूमि अधिग्रहण और बेदखली की घटनाएँ बढ़ रही हैं — जो कानूनी रूप से अवैध हैं।
- 5वीं अनुसूची एवं अनुच्छेद 244 का हनन
5th Schedule क्षेत्रों में राज्यपाल की विशेष जिम्मेदारी है कि वे आदिवासी भूमि और हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। लेकिन अनेक परियोजनाओं में ग्राम सभा की अनदेखी कर सीधे कंपनियों को लाभ पहुँचाया जा रहा है।
यह संविधान के मूल ढांचे के विपरीत है।
- समता जजमेंट (1997) – सुप्रीम कोर्ट
समता बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि
अनुसूचित क्षेत्रों में निजी कंपनियों को खनन या भूमि हस्तांतरण नहीं किया जा सकता।
सिर्फ ग्राम सभा, सहकारी समितियाँ या सरकारी एजेंसियाँ ही गतिविधियाँ चला सकती हैं।
आज इस निर्णय की खुलेआम अवहेलना की जा रही है।
- वेदांता जजमेंट (2013 – निएमगिरी केस)
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि
आदिवासियों की संस्कृति, आस्था और धार्मिक स्थल की रक्षा के लिए ग्राम सभा सर्वोच्च निर्णयकर्ता है।
किसी भी खनन/परियोजना की अंतिम स्वीकृति ग्राम सभा ही देगी।
आज वही ग्राम सभाएँ दबाव में, नकार दी जाती हैं।
- जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य (2011)
सुप्रीम कोर्ट ने सामुदायिक भूमि (Common Land) की सुरक्षा का आदेश देते हुए कहा कि
ग्राम की सामुदायिक जमीनें किसी भी निजी कंपनी या व्यक्ति को नहीं दी जा सकतीं।
इसके विपरीत अनुसूचित क्षेत्रों में सामुदायिक भूमि का अधिग्रहण तेज़ी से हो रहा है।
समस्याएँ और प्रहार
✔ जबरन विस्थापन और अधूरी पुनर्वास नीति
विकास परियोजनाओं के नाम पर लोगों को गांव, खेती और पुश्तैनी जमीन से जबरन हटाया जा रहा है। पुनर्वास नीति 2013 का पालन नहीं किया जा रहा।
✔ परंपरा, संस्कृति और धार्मिक स्थलों पर हमला
खनन–उद्योग, मशीनों और बाहरी हस्तक्षेप के कारण गोटुल, देवस्थानों, पहाड़–पानी, नृत्य–गीत और परंपरागत जीवनशैली प्रभावित हो रही है — जो अस्तित्व पर सीधा आघात है।
✔ ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी
पीईएसए (PESA) कानून व 5वीं अनुसूची के तहत ग्राम सभा सर्वोच्च है, फिर भी निर्णय कंपनियों के हित में किए जा रहे हैं।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की प्रमुख मांगें
- समता जजमेंट, वेदांता जजमेंट और FRA 2006 को सख्ती से लागू किया जाए।
- ग्राम सभाओं की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की भूमि अधिग्रहण/खनन कार्रवाई तुरंत रोकी जाए।
- पुनर्वास नीति 2013 के तहत पूर्ण मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- 5वीं अनुसूची क्षेत्रों में निजी कंपनियों की गतिविधियाँ बंद की जाएँ।
- परंपरागत संस्कृति, धार्मिक स्थलों और सामुदायिक भूमि को कानूनी सुरक्षा दी जाए।
- कंपनी–प्रशासन गठजोड़ द्वारा किए जा रहे अन्याय पर न्यायिक जांच आयोग की स्थापना।
- अनुसूचित क्षेत्रों में संविधान की मूल भावना के अनुरूप स्वशासन लागू किया जाए।
आंदोलन का उद्देश्य
“भूमि–माटी बचाओ सत्याग्रह आंदोलन” का संकल्प है कि
जल–जंगल–जमीन, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा
के लिए देशभर के वंचित, आदिवासी, एसटी, एससी, ओबीसी भाई–बहनों को संगठित कर एक मजबूत जन–आंदोलन खड़ा किया जाए।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की अपील
हम सभी समाजों से आह्वान करते हैं कि वे अपने अधिकारों की रक्षा, संविधान की गरिमा, और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए इस सत्याग्रह में हाथ मिलाएँ।
यह संघर्ष केवल जमीन का नहीं —
अस्तित्व, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा का संघर्ष है।