गाजा पट्टी में पिछले दो वर्षों से जारी संघर्ष के बीच स्थायी शांति की उम्मीदें एक बार फिर जाग उठी हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को घोषणा की कि इजरायल और हमास ने गाजा शांति योजना के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ट्रंप ने इसे “युद्ध के स्थायी अंत की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया है।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि मिस्र में लगातार तीन दिनों तक चली वार्ता के बाद यह समझौता हुआ है। योजना के पहले चरण में सभी बंधकों की रिहाई शामिल है। साथ ही, इजरायल ने अपनी सेना को सहमत रेखा तक पीछे हटाने पर सहमति दी है। इससे गाजा के नागरिकों को राहत मिलने और मानवीय सहायता पहुँचाने का रास्ता साफ होगा।हालांकि, इस समझौते से युद्धविराम की उम्मीदें बंधी हैं, लेकिन गाजा और फिलिस्तीन के भविष्य को लेकर अभी भी कई प्रश्न अनुत्तरित हैं। ट्रंप की शांति योजना में स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में गाजा के शासन में हमास की कोई भूमिका नहीं होगी। इसके स्थान पर एक अस्थायी, गैर-राजनीतिक फिलिस्तीनी समिति शासन का जिम्मा संभालेगी, जिसे आगे चलकर फिलिस्तीनी प्राधिकरण को सौंपा जाएगा।

योजना का यह हिस्सा विवादास्पद माना जा रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल अति-राष्ट्रवादी और कट्टरपंथी दल इस व्यवस्था का विरोध कर सकते हैं। इनमें से कई नेता गाजा में यहूदी बस्तियों के पुनर्निर्माण के पक्षधर हैं। दूसरी ओर, हमास ने भी संकेत दिया है कि वह गाजा के शासन में किसी न किसी रूप में अपनी भूमिका चाहता हैइजरायल और हमास दोनों पक्षों से समझौते पर सकारात्मक बयान आए हैं। इजरायल का कहना है कि यह कदम शांति बहाली के लिए जरूरी था, जबकि हमास ने इसे “बंधकों की रिहाई और संघर्ष विराम की दिशा में पहला कदम” बताया है। इसके बावजूद, दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की गहरी खाई अब भी बनी हुई है।विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल यह समझौता हिंसा पर अंकुश लगाने और राहत पहुँचाने की दिशा में अहम कदम है, लेकिन गाजा के दीर्घकालिक शासन को लेकर समाधान खोजना सबसे बड़ी चुनौती होगी। फिलिस्तीनी प्राधिकरण की भूमिका को लेकर इजरायल के भीतर ही मतभेद हैं और हमास भी अपने राजनीतिक वजूद से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं दिख रहा।