ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय कार्रवाई से पाकिस्तानी एयरबेसों को भारी क्षति, सात माह बाद भी जारी है मरम्मत,

मई माह में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान की गई सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तान को ऐसा रणनीतिक और सैन्य नुकसान पहुंचाया, जिसकी भरपाई वह आज तक नहीं कर पाया है। पाकिस्तान को इस बात का अनुमान नहीं था कि भारत का जवाब इतना सटीक, व्यापक और प्रभावशाली होगा। ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के लगभग 11 प्रमुख एयरबेसों को निशाना बनाया, जिससे पाकिस्तानी वायुसेना की परिचालन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई।भारत की कार्रवाई के सात महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पाकिस्तान के कई एयरबेस अब भी पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं हो सके हैं। विभिन्न ओपन सोर्स इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स और सैटेलाइट तस्वीरों से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान आज भी इन एयरबेसों की मरम्मत और पुनर्निर्माण में जुटा हुआ है।नूर खान एयरबेस, जिसे पाकिस्तानी वायुसेना की रीढ़ माना जाता है, भारत के हमले में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ था। पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से इसके नुकसान को स्वीकार किया है। मई 2025 से यहां मरम्मत कार्य जारी है। सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिलता है कि इस एयरबेस पर नई इमारतें और सुविधाएं बनाई जा रही हैं, जो हमले से हुई व्यापक क्षति की ओर इशारा करती हैं।भोलारी एयरबेस भारत की कार्रवाई में लगभग तबाह हो गया था। इस हमले में एयरबेस का प्रमुख हैंगर नष्ट हो गया, जिसे फिलहाल तिरपाल से ढक दिया गया है। माना जा रहा है कि इसके नीचे मरम्मत का काम चल रहा है। इस हमले में पाकिस्तानी वायुसेना के कई लड़ाकू विमानों के नष्ट होने की भी आशंका है।भारतीय सीमा के नजदीक स्थित मुरीदके एयरबेस को भी भारी नुकसान पहुंचा। यहां तैनात जेएफ-17, एफ-16 और ड्रोन संचालन की क्षमताएं प्रभावित हुईं। फॉरवर्ड ऑपरेटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के नष्ट होने से यह एयरबेस परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में इसकी कमांड और कंट्रोल बिल्डिंग को बड़े लाल तिरपाल से ढका हुआ देखा गया है, जिससे मरम्मत कार्य की पुष्टि होती है।मुशफ (सरगोधा) एयरबेस पर भारत के हमले में कमांड-एंड-कंट्रोल बिल्डिंग सहित कई अहम संरचनाएं नष्ट हो गई थीं।

हमले के बाद रनवे पर बड़े गड्ढे देखे गए थे, जिन्हें अब आंशिक रूप से ठीक कर लिया गया है। इसके बावजूद यहां से सीमित उड़ानें ही संचालित हो रही हैं।जैकोबाबाद एयरबेस पर भारतीय हमले से पाकिस्तान के रडार और वायु रक्षा प्रणालियों को भारी नुकसान हुआ। ये सिस्टम अभी भी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सके हैं। यहां के हैंगरों की छतों की मरम्मत की गई है, लेकिन लड़ाकू विमानों के नुकसान की आशंका बनी हुई है।रफीकी (पीएएफ बेस शोरकोट) एयरबेस में हैंगर और रनवे को गंभीर क्षति पहुंची। फिलहाल इस एयरबेस से केवल आपातकालीन ऑपरेशन ही किए जा रहे हैं। वहीं, सुक्कुर एयरबेस, जो भारत-पाक सीमा के रणनीतिक क्षेत्र में स्थित है, हमले के बाद उड़ानों के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया था।इसके अलावा चुनियां, पसरूर, सियालकोट और स्कार्दू एयरबेस भी भारतीय कार्रवाई की चपेट में आए। इन एयरबेसों का बड़ा हिस्सा आज भी निष्क्रिय है और पाकिस्तान सात महीने बीत जाने के बावजूद इन्हें पूरी तरह चालू नहीं कर पाया है।ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। यह कार्रवाई न केवल सैन्य दृष्टि से निर्णायक रही, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी पाकिस्तान को गहरा संदेश देने वाली साबित हुई है।

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