
उत्तर प्रदेश सरकार ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए शैक्षणिक सत्र 2025-26 से एमबीबीएस और पीजी (एमडी, एमएस) पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में सीटों की वृद्धि की है। इस सत्र में कुल 950 नई एमबीबीएस सीटें जोड़ी गई हैं, जिनमें 200 सीटें राजकीय मेडिकल कॉलेजों और 750 सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ाई गई हैं। इसके साथ ही राज्य में अब कुल 12,800 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी — जिनमें 5,450 सीटें राजकीय कॉलेजों में और 7,350 सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में हैं। इससे पहले क्रमशः 5,250 और 6,600 सीटें थीं।राज्य सरकार के इस निर्णय से उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा और मजबूती मिलने जा रही है। सीटों में हुई इस वृद्धि से न केवल मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में अवसरों का विस्तार होगा, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा। नए मेडिकल कॉलेजों और विस्तारित क्षमताओं के साथ प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार की उम्मीद है।इसी प्रकार, पीजी पाठ्यक्रम (एमडी, एमएस) के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इस सत्र में कुल 271 नई पीजी सीटें जोड़ी गई हैं। अब राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कुल 2,137 सीटें और निजी मेडिकल कॉलेजों में 2,160 सीटें उपलब्ध हैं। पहले यह संख्या क्रमशः 1,904 और 2,122 थी। इन नई सीटों में 233 सीटें राजकीय कॉलेजों में और 38 सीटें नारायणा मेडिकल कॉलेज, कानपुर में जोड़ी गई हैं।राज्य सरकार का यह कदम चिकित्सा क्षेत्र में मानव संसाधन की कमी को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार निरंतर इस दिशा में कार्य कर रही है कि हर जिले में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में एमबीबीएस और पीजी सीटों में हुई यह वृद्धि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, नए कॉलेजों की स्थापना और फैकल्टी भर्ती की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। इससे प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण सुधार आया है।
राज्य सरकार का लक्ष्य न केवल मेडिकल शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को भी ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों तक ले जाना है। नई सीटों के माध्यम से अधिक संख्या में प्रशिक्षित चिकित्सक तैयार होंगे, जिससे जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य इकाइयों में डॉक्टरों की उपलब्धता में सुधार होगा।विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा व्यापक होगा और चिकित्सा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकेगा जहाँ चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ समान रूप से सशक्त होंगी।सरकार का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा को जनहित और सामाजिक दायित्व के साथ जोड़ना है, ताकि हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और उपचार का अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।