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इंडिया से भारत : एक प्रवास” पुस्तक विमोचन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन,

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने बीते वर्षों में अनेक ऐतिहासिक और स्मरणीय उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्होंने देश को एक नई पहचान और दिशा दी है। उन्होंने कहा कि यह समय भारत के पुनर्जागरण का काल है, जिसमें राष्ट्र की सांस्कृतिक, सामाजिक और वैश्विक प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने का कार्य निरंतर जारी है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित “इंडिया से भारत : एक प्रवास” पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों ने भारत को एक सशक्त और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायपालिका के निर्णयों ने देश में विश्वास और समरसता को मजबूत किया है। अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर का निर्माण इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो बिना किसी विरोध के संभव हुआ और पूरे देश ने इसे स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह भारत की लोकतांत्रिक परिपक्वता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है।उन्होंने आगे कहा कि “वंदे मातरम्” जैसे राष्ट्रगीत की गरिमा को पुनः स्थापित करने का कार्य भी वर्तमान नेतृत्व में हुआ है। साथ ही, पड़ोसी देशों को भारत की शक्ति का एहसास कराने और वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए अनेक ठोस कदम उठाए गए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने न केवल अपने नागरिकों की रक्षा की, बल्कि अन्य देशों को भी सहायता प्रदान कर वैश्विक मैत्री और सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुस्तक के लेखक श्री प्रशांत पोल को बधाई देते हुए कहा कि यह कृति उनके लेखन जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2026 तक का कालखंड भारत के लिए स्वर्णिम युग के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें राष्ट्रहित में अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन की सम्मानपूर्वक वापसी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने देशवासियों में गर्व और आत्मविश्वास की भावना को और मजबूत किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे टीवी9 भारतवर्ष के निदेशक श्री हेमंत शर्मा ने कहा कि भारत को उसकी वास्तविक पहचान दिलाने के लिए केवल विचार नहीं, बल्कि ठोस कार्यों की आवश्यकता होती है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना, राम पथ और कृष्ण पाथेय जैसे प्रकल्पों के माध्यम से प्रदेश अपने गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित कर रहा है।

पुस्तक के लेखक श्री प्रशांत पोल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस पुस्तक के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया है कि भारत कभी भी कमजोर या लाचार राष्ट्र नहीं रहा। उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि समय-समय पर देश ने चुनौतियों का सामना किया, लेकिन हर बार मजबूती के साथ उभरा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।कार्यक्रम में श्री दीपक शर्मा ने भी पुस्तक के केंद्रीय विषय पर अपने विचार रखे। इसके साथ ही प्रज्ञा प्रवाह के श्री धीरेन्द्र चतुर्वेदी, विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रविन्द्र कान्हेरे और प्रभात प्रकाशन के श्री राकेश सिंह सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को दो अध्ययन ग्रंथ भी भेंट किए गए। पहला ग्रंथ “सुशासन के परिप्रेक्ष्य में सूचना का अधिकार अधिनियम का पालन एवं सुझाव” मध्यप्रदेश पॉलिसी रिसर्च एंड एनालिसिस लीग द्वारा प्रकाशित है। दूसरा ग्रंथ “युवा मंथन: सोच, सरोकार और संभावनाएं” प्रज्ञा प्रवाह मध्य भारत प्रांत द्वारा प्रकाशित किया गया है, जिसमें युवाओं के विचारों और संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया है।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल एक पुस्तक विमोचन का अवसर था, बल्कि भारत के सांस्कृतिक और वैचारिक विकास पर व्यापक चर्चा का मंच भी बना।

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