इंडोनेशिया में भारतीय मूल के कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट बनकर इंडोनेशियाई सरकार और रक्षा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को कथित रूप से गुमराह करने तथा अरबों डॉलर के रक्षा सौदों तक पहुंच बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) और इंडोनेशियाई प्रकाशन Tempo की संयुक्त जांच में दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने स्वयं को CIA से जुड़ा अधिकारी बताकर इंडोनेशिया के प्रभावशाली राजनीतिक और रक्षा अधिकारियों के बीच अपनी पहचान बनाई।रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीवास्तव ने उस समय इंडोनेशिया के तत्कालीन रक्षा मंत्री और वर्तमान राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो से निकट संबंध स्थापित किए। बताया जाता है कि दोनों के बीच संबंध इतने प्रगाढ़ हो गए थे कि प्राबोवो उन्हें “मिस्टर जी” कहकर संबोधित करते थे। जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि श्रीवास्तव राष्ट्रपति प्राबोवो की कुछ निजी आदतों से भी परिचित थे, जिन्हें सामान्यतः केवल उनके करीबी लोग ही जानते थे।संयुक्त जांच के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के बीच श्रीवास्तव के नियंत्रण वाली कंपनियों को इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और एक सरकारी रक्षा कंपनी से पांच प्रारंभिक रक्षा समझौते प्राप्त हुए। इनमें तीन लेटर ऑफ इंटेंट (LOI), एक अतिरिक्त LOI तथा एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) शामिल था।प्रस्तावित रक्षा सौदों में 36 F-15 फाइटर जेट, UH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट तथा इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के लिए जॉइंट ऑपरेशन्स कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल थे। जांचकर्ताओं द्वारा देखी गई तस्वीरों में श्रीवास्तव को राष्ट्रपति प्राबोवो और उनकी कंपनी के अधिकारियों के साथ समझौते से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेते हुए भी देखा गया है।हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार इंडोनेशिया सरकार ने इन प्रस्तावित रक्षा खरीद सौदों में से किसी को भी अंतिम रूप नहीं दिया और न ही आगे बढ़ाया।यह मामला अंतरराष्ट्रीय रक्षा सौदों में पारदर्शिता, सुरक्षा और सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल संबंधित आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।