जरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 3 जून की सुबह, जब इजरायली लड़ाकू विमान ईरान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर चुके थे और संभावित लक्ष्यों पर हमला करने ही वाले थे, तभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक फोन कॉल इस पूरे सैन्य कार्रवाई को रोकने का कारण बना।यरुशलम पोस्ट द्वारा सूत्रों के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, यह कॉल बेहद सख्त और स्पष्ट था। राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को चेतावनी भरे लहजे में तत्काल हमले को रोकने का निर्देश दिया। बताया जा रहा है कि ट्रंप इस एकतरफा सैन्य कार्रवाई को अमेरिका की मध्यस्थता और युद्धविराम की अपील की अनदेखी मानते थे, और उन्होंने इसे ‘व्यक्तिगत अपमान’ की तरह लिया।सूत्रों के अनुसार, फोन कॉल के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अधिकतर समय चुप्पी साधे रखी

और अंततः इजरायली वायु सेना को कार्रवाई रोकने के आदेश दे दिए गए। यह हस्तक्षेप उस समय हुआ जब अमेरिका ने पहले ही दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए युद्धविराम की घोषणा कर दी थी।विश्लेषकों के अनुसार यह घटना इस बात का संकेत है कि इजरायल और अमेरिका के संबंधों में रणनीतिक सामंजस्य के साथ-साथ अब स्पष्ट शर्तें और सीमाएं भी जुड़ गई हैं। यह भी स्पष्ट हुआ है कि वॉशिंगटन, पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष को टालने के लिए अब कहीं अधिक मुखर और प्रत्यक्ष भूमिका निभा रहा है।यह घटनाक्रम न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए एक निर्णायक मोड़ है, बल्कि वैश्विक कूटनीति और रक्षा नीति के लिहाज़ से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।