आश्विन अमावस्या पर लगेगा साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा असर,

वैदिक पंचांग के अनुसार, रविवार 21 सितम्बर को आश्विन अमावस्या है। खगोलीय दृष्टि से यह दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि आज साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है।ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 10 बजकर 59 मिनट से प्रारंभ होकर 3 बजकर 23 मिनट (ब्रह्ममुहूर्त) तक रहेगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसके लिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। सामान्यत: सूर्य ग्रहण के दिन सूतक चार प्रहर पहले शुरू होता है, परंतु इस बार ऐसा नहीं होगा।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव कुछ राशि विशेष पर देखा जा सकता है। मान्यताओं के मुताबिक, दो राशियों के जातकों पर इस दौरान राहु की कुदृष्टि पड़ सकती है। इसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षेत्र दोनों पर हो सकता है। इस अवधि में उन्हें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है क्योंकि बने-बनाए कार्य भी बाधित हो सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य न हो, परंतु इसका खगोलीय और ज्योतिषीय महत्व अपनी जगह कायम है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दौरान व्यक्ति को संयमित आचरण और शास्त्रसम्मत नियमों का पालन करना चाहिए।

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण को आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण समय माना गया है। आचार्यों का कहना है कि इस अवधि में दान, जप और ध्यान करना लाभकारी होता है। वहीं, गर्भवती महिलाओं और रोगियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।कुल मिलाकर, आश्विन अमावस्या के साथ पड़ने वाला यह सूर्य ग्रहण भले ही भारत में प्रत्यक्ष दिखाई न दे, लेकिन इसका ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व अवश्य है। आचार्यों का कहना है कि इस समय व्यक्ति को नकारात्मक विचारों से बचकर सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों की ओर ध्यान देना चाहिए।

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