


भोपाल, 13 सितम्बर।
अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर कोयतोड़ गोंडवाना महासभा, मध्यप्रदेश ने आज महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से आदिवासी समाज की अस्मिता, परंपरा और अधिकारों की रक्षा हेतु संविधान, सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों एवं संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणाओं (UNDRIP 2007) का हवाला देते हुए ठोस कदम उठाने की मांग की।
मुख्य माँगें
- भूमि, जल एवं जंगल पर अधिकार: वनाधिकार अधिनियम 2006 का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन, ग्राम सभा की अनुमति के बिना खनन/परियोजनाओं पर रोक एवं विस्थापित आदिवासियों के लिए न्यायसंगत पुनर्वास नीति।
- धर्म, भाषा एवं संस्कृति का संरक्षण: आदिवासी धर्म को पृथक Tribal Religion Code, भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना और विश्वविद्यालय स्तर पर आदिवासी अध्ययन संस्थान स्थापित करना।
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रवृत्ति, कोचिंग सुविधाएँ, आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्र और मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने हेतु विशेष योजनाएँ।
- रोजगार एवं आत्मनिर्भरता: लघु वनोपज आधारित उद्योग, कौशल विकास केंद्र, महिला एवं युवा सशक्तिकरण योजनाएँ तथा नशामुक्ति अभियान।
- राजनैतिक भागीदारी एवं प्रशासन: पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र विस्तार) अधिनियम 1996 (PESA) का प्रभावी क्रियान्वयन और निर्णय प्रक्रिया में आदिवासी प्रतिनिधियों की भागीदारी।
- पर्यावरण संरक्षण: आदिवासी समाज के परंपरागत ज्ञान का संरक्षण और पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका की मान्यता।
संगठन ने कहा कि आदिवासी अधिकार दान नहीं, बल्कि संविधानिक अधिकार हैं और राज्य का कर्तव्य है कि उनका पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।