
भोपाल, – अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी स्थित मानस भवन में विश्व के देशज जनों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस बड़े उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। विभिन्न जिलों से डीजे और बैंड दलों के साथ सैकड़ों की संख्या में समाज के सदस्य पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक रंग में उपस्थित रहे।कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। मंच से आदिवासी कला, संस्कृति और परंपराओं के महत्व को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने समाज में एकजुटता और जागरूकता के संदेश दिए। समाज के प्रबुद्ध जनों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सीहोर और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जतिया में सेवा दे चुके तथा वर्तमान में पीपल्स कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर में कार्यरत वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश गौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज के लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने और विचार-विनिमय का मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आदिवासी समाज के बच्चों के लिए आज भी उचित शिक्षा की व्यवस्था नहीं है। समाज को बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां सक्षम और आत्मनिर्भर बन सकें।

डॉ. गौड़ ने जोर देकर कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे आदिवासी समाज सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत हो सकता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे अपने गांव-गांव में शिक्षा के महत्व को प्रचारित करें और बच्चों को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करें।इस अवसर पर उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी आदिवासी अधिकारों, सांस्कृतिक संरक्षण और रोजगार के अवसरों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एकजुट होकर समाज की प्रगति और विकास के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। मानस भवन का वातावरण पूरे दिन आदिवासी संस्कृति के रंग और एकजुटता की भावना से सराबोर रहा।