अटल बिहारी वाजपेयी का सुशासन और राष्ट्र निर्माण आज भी प्रेरणास्रोत,

भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर बुधवार को सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग नरेला विधानसभा अंतर्गत हरि मैरिज गार्डन में आयोजित विधानसभा सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मंत्री श्री सारंग ने स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्र निर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान, उनके दूरदर्शी सुशासन मॉडल, संवेदनशील कवि हृदय और अजातशत्रु राजनेता के रूप में उनकी विशिष्ट पहचान पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।मंत्री श्री सारंग ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी का सुशासन मॉडल “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” की अवधारणा पर आधारित था। उन्होंने शासन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया और ई-गवर्नेंस तथा पारदर्शिता को प्राथमिकता दी। सूचना का अधिकार, डिजिटल प्रशासन, पंचायतों और स्थानीय निकायों के सशक्तिकरण जैसे कदमों ने शासन को आम नागरिक के और अधिक निकट लाने का कार्य किया। अंत्योदय जैसी योजनाओं के माध्यम से समाज के गरीब और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का उनका दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक है।मंत्री श्री सारंग ने कहा कि स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में देश की आधारभूत संरचना को अभूतपूर्व गति मिली। स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दिल्ली मेट्रो जैसी ऐतिहासिक परियोजनाओं ने भारत के परिवहन और कनेक्टिविटी तंत्र को मजबूत किया। नई दूरसंचार नीति ने देश में मोबाइल और डिजिटल क्रांति की नींव रखी, जिससे आम नागरिक तक संचार सुविधाएँ पहुँचीं। आर्थिक सुधारों की दिशा में एफआरबीएम अधिनियम और पारदर्शी विनिवेश नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता और मजबूती प्रदान की।उन्होंने कहा कि शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में सर्व शिक्षा अभियान, अंत्योदय अन्न योजना तथा शहरी क्षेत्रों के लिए अमृत योजना जैसी पहलों ने समावेशी विकास को नई दिशा दी। कृषि क्षेत्र में किसान क्रेडिट कार्ड और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य किया। यह सभी पहलें अटल जी की उस सोच को दर्शाती हैं, जिसमें विकास का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।

मंत्री श्री सारंग ने कहा कि स्व. अटल बिहारी वाजपेयी रक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भी दूरदर्शी नेतृत्व के प्रतीक थे। पोखरण-2 परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध के दौरान उनके दृढ़ राजनीतिक निर्णयों ने भारत को वैश्विक मंच पर एक सशक्त और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। वे एक ऐसे राजनेता थे, जिनका सम्मान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों समान रूप से करते थे। उनका कवि हृदय, संवादशीलता और राष्ट्र के प्रति समर्पण उन्हें एक अजातशत्रु नेता के रूप में प्रतिष्ठित करता है।कार्यक्रम में भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय, जिला अध्यक्ष श्री रविंद्र यति, वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सम्मेलन के माध्यम से अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्रसेवा और सुशासन के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाने का संदेश दिया गया।

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