
भारतीय नौसेना के स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत ने अपने पहले विदेश दौरे के रूप में श्रीलंका का रुख किया, जहां कोलंबो बंदरगाह पर उसका शानदार स्वागत किया गया। यह यात्रा न केवल भारत की समुद्री शक्ति और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग और समुद्री डिप्लोमेसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानी जा रही है। INS विक्रांत श्रीलंकाई नौसेना द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2025 (IFR) में भाग लेने के लिए कोलंबो पहुंचा है। यह पहली बार है जब INS विक्रांत ऑपरेशनल तैनाती के दौरान किसी विदेशी बंदरगाह पर पहुंचा हो, जो इस दौरे को और भी ऐतिहासिक बनाता है।कोलंबो बंदरगाह पर भव्य स्वागतINS विक्रांत के कोलंबो पहुंचते ही बंदरगाह पर बड़ी संख्या में श्रीलंकाई नागरिक और भारतीय प्रवासी उत्साहपूर्वक एकत्रित हुए। जहाज के भव्य आकार और आधुनिक क्षमताओं को देखने के लिए विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में काफी उत्साह देखा गया। बंदरगाह पर तैनात अधिकारियों ने पारंपरिक रीति से भारतीय जहाज का स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच बनी विश्वास की मजबूत नींव को दर्शाता है।विक्रांत की उपस्थिति ने बंदरगाह पर अलग ही माहौल बना दिया। इसे देखने वालों की भीड़ यह साबित कर रही थी कि भारत और श्रीलंका के बीच न केवल राजनीतिक या सैन्य संबंध मजबूत हैं, बल्कि दोनों देशों के आम नागरिकों के बीच भी आपसी सम्मान और सद्भावना का रिश्ता बेहद गहरा है।INS विक्रांत का यह दौरा भारत की समुद्री डिप्लोमेसी का एक हिस्सा है, जिसके तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ रक्षा और आर्थिक सहयोग को और मजबूत बना रहा है। श्रीलंका की आर्थिक स्थिति को स्थिर करने के लिए भारत द्वारा दी गई व्यापक सहायता ने भी द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई प्रदान की है। इस दौरे ने यह संदेश भी दिया है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार और भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को निरंतर मजबूत कर रहा है।भारत सरकार और भारतीय नौसेना लगातार क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इस संदर्भ में, INS विक्रांत का श्रीलंका दौरा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है।वर्ष 2022 में भारत के पहले पूर्णत: स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर के रूप में कमीशन किया गया INS विक्रांत देश की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और नौसैनिक शक्ति का एक बड़ा उदाहरण है। 45,000 टन वजनी इस कैरियर में अत्याधुनिक तकनीक, लड़ाकू विमानों के संचालन की क्षमता और उन्नत सुरक्षा प्रणालियाँ शामिल हैं। इसकी तैनाती भारतीय नौसेना को समुद्री अभियानों में अतिरिक्त मजबूती प्रदान करती है।
श्रीलंका पहुंचकर विक्रांत ने न केवल भारत की सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन किया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए किस प्रकार जिम्मेदारी निभा रहा है।भारत और श्रीलंका के बीच सैन्य संबंध दशकों पुराने और मजबूत हैं। चाहे प्रशिक्षण हो, तकनीकी सहयोग, मानवीय सहायता या समुद्री सुरक्षा—दोनों देशों की सेनाएँ निरंतर संपर्क में रहती हैं। समय-समय पर दोनों देशों की नौसेनाएँ संयुक्त अभ्यास भी करती रही हैं, जिससे इंटरऑपरेबिलिटी और आपसी विश्वास में वृद्धि हुई है।श्रीलंकाई नौसेना अपनी 75वीं वर्षगांठ मना रही है और इसी के तहत इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में विभिन्न देशों की नौसेनाएँ भाग ले रही हैं। भारत की ओर से INS विक्रांत की भागीदारी न केवल श्रीलंका के प्रति सद्भावना का प्रतीक है, बल्कि यह भी बताती है कि दोनों देशों के रिश्ते केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मजबूत सैन्य साझेदारी का भी आधार रखते हैं।INS विक्रांत का श्रीलंका दौरा केवल एक राजनयिक शिष्टाचार भर नहीं है, बल्कि हिंद महासागर में भारत की बढ़ती समुद्री क्षमताओं और रणनीतिक मौजूदगी का स्पष्ट संदेश है। यह दौरा दर्शाता है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार की सुरक्षा और छोटी अर्थव्यवस्थाओं के समर्थन में अग्रणी भूमिका निभाना जारी रखेगा।