अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 19 सितंबर को H-1B वीज़ा शुल्क में भारी वृद्धि की घोषणा के बाद टेक इंडस्ट्री और भारतीय प्रवासी समुदाय में अफरा-तफरी मच गई है। अब इसकी लागत लगभग 1,00,000 डॉलर तक पहुँच गई है, जो पहले की तुलना में लगभग 50 गुना अधिक है। इस फैसले से अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवरों के भविष्य को लेकर असमंजस बढ़ गया है।इस घोषणा के बाद भारतीय प्रवासी सोशल मीडिया पर अपने-अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। एक भारतीय महिला ने वीज़ा की अनिश्चितताओं को लेकर सवाल उठाया कि क्या उन्हें अपने H-1B वीज़ा पर काम कर रहे पति को छोड़कर किसी अमेरिकी नागरिक से विवाह करना चाहिए, ताकि ग्रीन कार्ड प्राप्त कर सकें और स्थाई तौर पर अमेरिका में रह सकें। इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस को जन्म दिया।विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियम विदेशी कर्मचारियों पर प्रतिकूल असर डालेंगे और टेक इंडस्ट्री को भी झटका लगेगा। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को विदेश यात्रा से बचने की चेतावनी दी है, वहीं बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारी वापसी की तैयारी कर रहे हैं।हालाँकि, 20 सितंबर को व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क केवल नए आवेदनों पर लागू होगा और एकमुश्त लिया जाएगा। इसके बावजूद H-1B कार्यक्रम का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है, जिससे भारतीय समुदाय में असुरक्षा और बेचैनी बनी हुई है