H-1B वीजा पर ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख: अमेरिकी नौकरियों पर विदेशी कर्मचारियों के कब्जे का आरोप,

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने फिर एक बार विदेशी कर्मचारियों, विशेषकर भारतीय पेशेवरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट (Department of Labor) ने एक नया विज्ञापन जारी किया है, जिसमें अमेरिकी कंपनियों पर H-1B वीजा कार्यक्रम का दुरुपयोग करने और अमेरिकी युवाओं की नौकरियां विदेशी कर्मचारियों, विशेष रूप से भारतीय आईटी पेशेवरों, को देने का आरोप लगाया गया है।इस विज्ञापन को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी किया गया है। वीडियो और ग्राफिक सामग्री वाले इस विज्ञापन में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि “युवा अमेरिकियों से उनका सपना छीन लिया गया, क्योंकि कंपनियों ने H-1B वीजा का दुरुपयोग करते हुए विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी।” लेबर डिपार्टमेंट ने अपने संदेश में जोड़ा — “हम ऐसी कंपनियों को उनके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराएंगे और अमेरिकी लोगों के लिए अमेरिकी सपने को फिर से साकार करेंगे।”

भारतीय पेशेवरों पर विशेष निशाना

अमेरिकी श्रम विभाग ने अपने बयान में यह भी उल्लेख किया कि H-1B वीजा प्रणाली का सबसे बड़ा लाभार्थी भारत रहा है, और भारतीय आईटी कंपनियों द्वारा अमेरिका में बड़ी संख्या में तकनीकी पेशेवरों की तैनाती ने स्थानीय अमेरिकी युवाओं के अवसरों को सीमित कर दिया है। विभाग ने कहा कि “पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि अमेरिकी कंपनियां स्थानीय कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन पर विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त कर रही हैं, जिससे अमेरिकी श्रम बाजार पर दबाव बढ़ा है।”इस बयान से भारत-अमेरिका संबंधों में नई कूटनीतिक हलचल मचने की संभावना है, क्योंकि भारत लगातार यह कहता आया है कि उसके पेशेवर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं, न कि स्थानीय युवाओं की नौकरियां छीन रहे हैं।

‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ के तहत सख्त जांच

लेबर डिपार्टमेंट का यह कदम उसके चल रहे ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ के तहत उठाया गया है। यह परियोजना सितंबर 2025 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य H-1B वीजा के अनुपालन (Compliance) की निगरानी और ऑडिट करना है। विभाग ने कहा है कि यह प्रोजेक्ट उन कंपनियों पर कार्रवाई करेगा जो तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी पेशेवरों को कम वेतन पर नियुक्त कर रही हैं।एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अमेरिकी कंपनियां वीजा प्रणाली का दुरुपयोग न करें। विदेशी पेशेवरों का स्वागत तब तक है जब तक वे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा में हिस्सा ले रहे हों, लेकिन अमेरिकी युवाओं के अवसर छीनना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

H-1B वीजा क्या है

H-1B वीजा अमेरिका की एक अस्थायी कार्य वीजा प्रणाली है, जिसके तहत विदेशी पेशेवरों को अमेरिकी कंपनियों में काम करने की अनुमति मिलती है। यह वीजा खासतौर पर आईटी, इंजीनियरिंग, विज्ञान, और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों के लिए होता है। हर वर्ष अमेरिका लगभग 85,000 H-1B वीजा जारी करता है, जिनमें से अधिकांश भारतीय आईटी कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों को मिलते हैं।

पिछले अनुभव और विवाद

ट्रंप प्रशासन पहले भी “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत H-1B वीजा को लेकर सख्त कदम उठा चुका है। 2017–2020 के बीच वीजा नियमों में कई बदलाव किए गए थे, जिससे विदेशी पेशेवरों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई थी। वर्तमान में जारी यह विज्ञापन उसी नीति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।कई अमेरिकी और भारतीय उद्योग विशेषज्ञों ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि तकनीकी उद्योग में कुशल कर्मचारियों की भारी कमी है, और H-1B वीजा धारक उस कमी को पूरा करते हैं। उनका कहना है कि विदेशी पेशेवरों पर प्रतिबंध लगाने से अमेरिकी नवाचार क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

भारत की संभावित प्रतिक्रिया

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत इस विज्ञापन और बयान का “गंभीरता से संज्ञान” ले रहा है। भारत का मानना है कि उसके पेशेवर अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धी और नवाचार-समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत पहले भी इस मुद्दे को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं में उठाता रहा है, विशेषकर तब जब ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा शुल्क बढ़ाया था।

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