
भोपाल। राजधानी भोपाल में 13 अक्टूबर को रोशनपुरा चौराहे पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन (GSU) के छात्रों के साथ कथित अभद्रता और दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। इस संबंध में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) और छात्र संगठन के पदाधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।संगठन के अनुसार, 13 अक्टूबर को छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने और छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले को गंभीर बताते हुए संगठन के प्रतिनिधियों ने पुलिस आयुक्त और गृह विभाग के संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखी।इस अवसर पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के भोपाल जिला अध्यक्ष जयकुमार बरकड़े, प्रदेश कार्यालय भोपाल से बंटी धुर्वे, GSU के प्रदेश अध्यक्ष निखलेश शाह उईके, प्रदेश महासचिव राजेंद्र परते, राष्ट्रीय विधि सलाहकार गगन भलावी और प्रदेश प्रवक्ता अभिताभ धुर्वे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
वीडियो और दस्तावेजों की जांच की मांग
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक और संगठन को अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति के साथ अभद्र व्यवहार या अनुचित भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाने की मांग की।ज्ञापन में घटना से संबंधित वीडियो रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करने की मांग की गई है। संगठन ने कहा कि जांच के आधार पर यदि किसी पुलिसकर्मी की गलती सामने आती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।इसके अलावा, हिरासत में लिए गए छात्रों के साथ किए गए व्यवहार की कानूनी वैधता की जांच कर उसकी लिखित रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है।
कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन और कानूनी कदम उठाने की चेतावनी
गोंगपा नेताओं ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों के सम्मान, अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई चाहता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग और न्यायालय सहित संबंधित संस्थाओं के समक्ष अपनी बात रखेगा।संगठन ने कहा कि छात्रों की शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए और पूरे मामले में तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।