बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री ने किसानों से किया संवाद, खेती के साथ प्रोसेसिंग, पशुपालन और उद्यानिकी अपनाने पर दिया जोररतलाम/उज्जैन, बुधवार। प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और पशुपालन को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए सरकार लगातार नई पहल कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत नस्ल के पशुपालन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए पशुपालकों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से वृंदावन ग्राम में पशु प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 50 हजार रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। पुरस्कारों का वितरण दीपावली पर गोवर्धन पूजा के अवसर पर किया जाएगा।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को रतलाम में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को उज्जैन से वर्चुअल संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि रतलाम के किसान पारंपरिक खेती के साथ अब नई तकनीक और अलग-अलग प्रकार की कृषि गतिविधियों को अपना रहे हैं। इससे किसानों की आय के नए रास्ते खुल रहे हैं।उन्होंने कहा कि आज किसान केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फसल प्रोसेसिंग, पशुपालन, उद्यानिकी और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। सरकार भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।30 लाख किसानों के खेतों में सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्यमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के साथ पंप ऊर्जीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने 30 लाख किसानों के खेतों पर सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि रबी सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।रतलाम के कृषि क्षेत्र की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबल के पानी से क्षेत्र में सिंचाई का विस्तार हुआ है। नदी जोड़ो अभियान से आने वाले समय में किसानों को और लाभ मिलेगा। वहीं एक्सप्रेस-वे बनने से रतलाम को बेहतर बाजार व्यवस्था मिली है।उन्होंने कहा कि रतलाम के किसान बहुउद्देशीय फसलों के साथ-साथ कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग में भी आगे बढ़ रहे हैं। क्षेत्र में अंगूर की खेती और उसकी प्रोसेसिंग का व्यवसाय भी अच्छी तरह विकसित हुआ है। मुख्यमंत्री ने रतलाम की सेव और उन्नत कृषि की सराहना करते हुए स्थानीय तेल वाली कचौरी का भी जिक्र किया।किसानों ने साझा किए अपने अनुभवकार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्नतशील किसानों से संवाद किया। पीएम एफएमई योजना का लाभ लेकर घी का व्यवसाय करने वाले किसान दिलीप पाटीदार ने बताया कि उन्हें योजना के तहत करीब 30 लाख 10 हजार रुपये की सब्सिडी मिली है। वे बिलोना पद्धति से घी तैयार करते हैं और उनके उत्पाद की मांग देश के साथ-साथ अमेरिका और श्रीलंका में भी पहुंच रही है।गुलाब की खेती करने वाले किसान प्रवीण पाटीदार ने भी मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए।मुख्यमंत्री ने अमरूद उत्पादक किसान कन्हैयालाल पाटीदार से भी बातचीत की। किसान ने बताया कि वे कम शुगर वाली वीएनआर, पिंक और रेड डायमंड किस्म के अमरूद का उत्पादन कर रहे हैं। बाजार की मांग के अनुसार उनके अमरूद मुंबई, दिल्ली और असम तक भेजे जाते हैं।इसी तरह जैविक उर्वरक के लिए रिसर्च सेंटर संचालित करने वाली रेखा व्यास ने जैविक खाद के निर्माण और उपयोग की जानकारी दी। लहसुन-प्याज उत्पादक किसान धर्मेंद्र जाट ने मुख्यमंत्री से स्थानीय मालवी भाषा में संवाद किया।खेती के साथ दूसरे आय के स्रोत विकसित करने पर जोरबलराम कृषि महोत्सव में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक और नई खेती पद्धतियों की जानकारी दी गई। किसानों से खेती के साथ पशुपालन, उद्यानिकी, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध गतिविधियों को अपनाने का आह्वान किया गया, ताकि एक ही स्रोत पर निर्भरता कम हो और परिवार की आय के कई साधन विकसित हो सकें।कार्यक्रम में एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप, जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय और रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।