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मध्यप्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय, सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज; कई जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट,

भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून ने अब पूरी रफ्तार पकड़ ली है। जुलाई के शुरुआती आठ दिनों में हुई लगातार और व्यापक बारिश ने जून महीने में हुई वर्षा की कमी की भरपाई कर दी है। प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए भी कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज बारिश का सबसे अधिक असर देखने की संभावना है, जबकि उज्जैन, सागर और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम के बिगड़े रहने का अनुमान है।मौसम विभाग के अनुसार भिंड जिले के लिए अति भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं मुरैना, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, राजगढ़, आगर-मालवा और रतलाम जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ जलभराव, नदी-नालों के उफान और आवागमन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।इसके अलावा नीमच, उज्जैन, शाजापुर, श्योपुर, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, दमोह, छतरपुर और पन्ना सहित कई जिलों में भी गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। राजधानी भोपाल, रायसेन, सीहोर, इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में भी वर्षा का सिलसिला जारी रहने का पूर्वानुमान है।लगातार हो रही बारिश का प्रभाव प्रदेश के तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अधिकांश शहरों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली है। इंदौर में अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस, जबलपुर में 28.5 डिग्री, उज्जैन में 29.2 डिग्री, ग्वालियर में 29.7 डिग्री तथा भोपाल में 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान सीधी में 33.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम अधिकतम तापमान छिंदवाड़ा में 25.4 डिग्री सेल्सियस रहा।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जून महीने में मानसून की गति अपेक्षाकृत धीमी रहने के कारण मध्यप्रदेश में सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी। इससे किसानों और जलाशयों को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हालांकि जुलाई के पहले आठ दिनों में हुई तेज और व्यापक बारिश ने स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। प्रदेश में अब तक 223.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 202.5 मिलीमीटर है। इस प्रकार मध्यप्रदेश में मानसून सीजन के दौरान अब तक औसत से लगभग 10 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है।क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिमी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 30 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि पूर्वी मध्यप्रदेश में अब भी औसत से लगभग 10 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता बनी रहने से पूर्वी क्षेत्रों में भी वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।प्रशासन ने भारी बारिश की संभावना को देखते हुए संबंधित जिलों में सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों के पास जाने से परहेज करें तथा मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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