इंदौर। आम नागरिकों को पासपोर्ट संबंधी सेवाएं अधिक सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण उपलब्ध कराने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में पहली बार संभाग स्तरीय पासपोर्ट सत्यापन पुलिस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नवीन तकनीकी प्रणालियों, प्रक्रियागत सुधारों तथा सत्यापन की गुणवत्ता से संबंधित पहलुओं का प्रशिक्षण देकर पासपोर्ट सत्यापन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना था।यह कार्यशाला अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) श्री ए. साईं मनोहर के मार्गदर्शन तथा उप पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) श्री तरुण नायक के निर्देशन में आयोजित की गई। इसमें इंदौर संभाग के आठ जिलों—इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी और बुरहानपुर—से पासपोर्ट सत्यापन कार्य से जुड़े पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। वहीं संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला से जुड़े।कार्यक्रम में पुलिस उपायुक्त (आसूचना एवं सुरक्षा) श्री अमन सिंह राठौड़, पुलिस मुख्यालय भोपाल की सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) श्रीमती रश्मि मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (आसूचना) श्रीमती प्रियंका डुडवे, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय भोपाल एवं इंदौर के अधिकारी तथा तकनीकी सहयोगी संस्था टीसीएस की विशेषज्ञ टीम भी उपस्थित रही। सभी विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को पासपोर्ट सत्यापन की आधुनिक तकनीकों, ऑनलाइन प्रक्रियाओं और आवश्यक सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी।इस अवसर पर पुलिस आयुक्त श्री संतोष कुमार सिंह ने कहा कि पासपोर्ट सत्यापन केवल एक औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के विश्वास, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से सीधे जुड़ा दायित्व है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि प्रत्येक सत्यापन निष्पक्ष, संवेदनशील और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी श्री सुतांशु चौरसिया ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस और पासपोर्ट विभाग के बीच बेहतर समन्वय के कारण वर्ष 2024 और 2025 में प्रदेश ने पासपोर्ट सत्यापन के क्षेत्र में देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया है। उन्होंने इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए तकनीकी दक्षता, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यप्रणाली को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) श्री आर.के. सिंह ने कहा कि त्वरित और तथ्यपरक पुलिस सत्यापन ही नागरिकों को समय पर पासपोर्ट उपलब्ध कराने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक प्रकरण में तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण करने और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।कार्यशाला के दौरान पुलिस मुख्यालय, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय तथा टीसीएस की तकनीकी टीम ने पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया के विभिन्न तकनीकी एवं प्रक्रियागत पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। साथ ही ऑनलाइन सत्यापन प्रणाली, दस्तावेजों की जांच, डेटा प्रबंधन, सुरक्षा मानकों और सत्यापन के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों पर भी विस्तार से जानकारी साझा की गई। प्रतिभागियों ने विभिन्न व्यावहारिक विषयों पर चर्चा करते हुए प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी तथा जनहितैषी बनाने के सुझाव भी दिए।मध्यप्रदेश पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों की कार्यकुशलता बढ़ाना, नागरिकों को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद पासपोर्ट सेवाएं उपलब्ध कराना तथा पुलिस और पासपोर्ट विभाग के बीच समन्वय को और मजबूत बनाना है। विभाग ने बताया कि इंदौर के बाद प्रदेश के अन्य संभागों में भी चरणबद्ध तरीके से ऐसी प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, ताकि पूरे मध्यप्रदेश में पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया को एक समान, आधुनिक और समयबद्ध बनाया जा सके।