
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को संपन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास, डिजिटल अधोसंरचना, शिक्षा, कृषि, पर्यावरण और सिंचाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में अधोसंरचना विकास, पुनर्वास, सूचना प्रौद्योगिकी, ई-गवर्नेंस, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा शहरी विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए हजारों करोड़ रुपये के प्रावधान स्वीकृत किए गए।मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में अधोसंरचना विकास और विभिन्न पुनर्वास कार्यों के लिए लगभग 2,300 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। इसके साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रस्ताव पर मध्यप्रदेश स्टेट डाटा सेंटर के आधुनिकीकरण, आईटी अवसंरचना विस्तार, डिजास्टर रिकवरी सिस्टम तथा अन्य तकनीकी कार्यों के लिए 800 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। सरकार का उद्देश्य राज्य की डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित, तेज और भविष्य की तकनीकों के अनुरूप बनाना है।कैबिनेट ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं को भी वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी। इसके तहत विज्ञान पार्क, एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना तथा बॉयो टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना एवं संचालन के लिए 123 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। उज्जैन में विकसित किए जा रहे आधुनिक विज्ञान पार्क और तारामंडल से विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं को खगोल विज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान के नए अवसर मिलेंगे, जबकि एकल नागरिक डाटाबेस से सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और सरल तरीके से नागरिकों तक पहुंचाया जा सकेगा।बैठक में मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को भी वर्ष 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। योजना के संचालन के लिए 495 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके तहत शासकीय हायर सेकेंडरी विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उच्च शिक्षा के लिए उनका आवागमन सुगम हो सके।
मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश आईटी, आईटीईएस एवं ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2023 में संशोधन को भी मंजूरी दी। संशोधित नीति के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उद्योगों के विस्तार, ऑनलाइन भूमि आवंटन और निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाया जाएगा।खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रस्ताव पर मध्यप्रदेश उपार्जित गेहूं, चना, ज्वार एवं बाजरा निस्तारण नीति-2026 को भी स्वीकृति दी गई। नई नीति के माध्यम से उपार्जित खाद्यान्न के पारदर्शी विक्रय, उचित मूल्य निर्धारण तथा ई-ऑक्शन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंत्रि-परिषद ने "नमो हरित नगर योजना" के लिए 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। योजना के तहत अगले पांच वर्षों में प्रदेश के 65 नगरीय निकायों में नगर वन विकसित किए जाएंगे, जिससे हरित क्षेत्र बढ़ाने, स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने और जैव विविधता को प्रोत्साहन मिलेगा।जल संसाधन विभाग के प्रस्तावों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंज सिंचाई परियोजना तथा मझगांव सिंचाई परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन के लिए 202.50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों को बेहतर पुनर्वास पैकेज उपलब्ध कराकर विकास परियोजनाओं को गति दी जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए मंत्रि-परिषद ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाने का निर्णय लिया। अब रिक्त पदों पर विभागीय स्तर पर नियमित और समयबद्ध भर्ती की जाएगी, जिससे सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी।बैठक में स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति अभिलेखों के पंजीयन पर अतिरिक्त स्टांप शुल्क एवं उपकर में छूट, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक-2026 के अनुमोदन तथा कमजोर वर्गों को प्रभावी विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए लीगल एड डिफेंस काउंसिल योजना को भी वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई।कैबिनेट के इन निर्णयों को प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस, औद्योगिक विकास, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, कृषि सुधार और आधारभूत संरचना को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और मध्यप्रदेश के समग्र विकास को नई मजबूती मिलेगी।